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Showing posts from December, 2017

इंसान मतलबी है। Human a selfish .

इंसान बहुत समझदार हैं उतना ही मतलबी भी..., हो सकता है आपको लगे कि मै पूर्वाग्रह से ग्रसित हुं पर यही सच है । हमे अपने इतिहास में ये गलत पढ़ाया जाता है कि इंसानों ने आज से कई सौ साल पहले फसल उगाना सीखा ,ये उतना ही गलत है जितना कि हम इंसान अपने  आप के वर्चस्व के लिए सोचते है । सच तो ये है कि हमने प्रकृति प्रदत्त उपहारों को सिर्फ अपने लिए उगाना शुरू किया ,सिर्फ अपने लिए बचाना शुरू किया । हमने जंगलों  से अपने जरूरत के फलों सब्जियों ,पौधों को चुन चुन कर निकालना शुरू किया , शुरू में हम जितना जरूरत होता था उतना ही लेते थे पर समय के साथ हम पूरे फसल के सभी रूपों को लेकर अपने लिए  सिर्फ अपने लिए उगाना शुरू किया । हम ये भूल गए या परवाह नहीं किए ??🤔 हमने उन पशु पक्षियों ,कीड़े ,मकोड़े जो अहसहाय होकर रह गए उनके बारे में कभी नहीं सोचा उनको सिर्फ कुछ सीमित संसाधनों और घास फूस के बदौलत छोड़ दिए । उनको भी मन होता होगा इन स्वादिष्ट पौधों को खाने के लिए इसलिए तो आ जाते है हमारे खेत , गार्डन  या सब्जियों के खेत में खाने के लिए ।। एक इंसान या कहे हर इंसान यही करता है कि उसे पत्थर...

एक टेढ़ा वृक्ष

कभी कभी आप ये मानते है कि आपने अपने लाइफ को थोड़ा टेढ़ा बना कर रखा है, उसी वृक्ष की तरह जो जंगल में काटा नहीं जाता क्योंंकि वह उपयोग के लायक नही है पर कहते है ना कि जब आपके पास कोई मौका जरूर मिलेगा की दूसरे आपके सामने एक पहाड़ बन जाए और आप एक ऊंट 😀। यकीनन उस समय एहसास होता है कि जो होना है तो वो होकर रहेगा ।उस समय आप उस वृक्ष की तरह हो जाते है जो टेढ़ा तो हुआ पर उतना ही आकर्षक हो गया कि हर कोई उसे पाना चाहता है ,तोड़ना चाहता है अपने उपयोग के लिए ।  ज़िन्दगी तब बदनसीब लगती है पर यही तो मौका है जब आप दूसरों के लिए बेशकीमती बन जाते हो पर खुद के लिए एक अकेला टेढ़ा सा वृक्ष ।।