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Showing posts from 2020

जीवन एक पहेली..

एक  बार की बात है, एक तोता  धूप में बैठा होता है.., तभी वहां से यमराज जी गुजरते है , गुजरते हुए वो तोता को देख कर मुस्कुरा देते है ।  यमराज जी को मुस्कुराते हुए देख कर तोता सोच में पढ़ जाता है, कि आखिर यमराज जी क्यूं मुस्कुराए.. यही सोच में पड़ा रहता है वो, तभी उसका दोस्त बाज आता है , उससे पूछता है कि क्यूं परेशान हो कहके ?? वो तोता सारी बात बताता है, तो वो बाज उसे अपने पीठ में बिठा कर कई सौ मिल दूर एक सुंदर से टापू मे छोड़ कर आ जाता है । और खुद उस जगह मे बैठ जाता है । वापस आते हुए यमराज जी वहां से गुजरते हुए उसे देख कर फिर मुस्करा  देते है ।  तो बाज उससे रिक्वेस्ट कर के पूछता है , आप तोते को भी देख के मुस्कुराए थे ।  आप मुझे बताएं कि ऐसा क्यों ?? तो यमराज जी बोले सुबह जाते समय तोते को यहां धूप तापते देखा तो इसलिए मुस्कुराया था क्यूंकि इसकी मृत्यु तो कई मिल दूर एक टापू मे होने वाली है और ये यहां धूप सेंक रहा है,,, * जीवन ऐसा ही है कोई नहीं जानता कल किस पल में क्या लिखा है..* कई बार कई महत्वपूर्ण पद मे बैठे लोग कई बातो का जवाब नहीं देते या रेस्पॉ...

शराबी के बेटा कैसे बना कलेक्टर !!

एक पुरानी घटना है  शायद मध्य प्रदेश का है,  वहां एक शराबी के दो बेटे थे , वो शराबी अपने बेटे और पत्नि को बहुत मारता था,  घर में लड़ाई आम बात थी,, और ज्यादा कुछ काम धाम नहीं करता था । कई साल बीत गए और उनके दोनों बेटों में से एक बेटा  कलेक्टर बन गया  और दूसरा बेटा अपने पिता की तरह शराबी हो गया । तब किसी समाचार वाले को पता चला तो उनके यहां इंटरव्यू लेने पहुंचा । और उसने पूछा दोनों से कि आप लोगो ऐसे कैसे और क्यों बने .. * एक शराबी तो एक कलेक्टर* तो शराबी बेटे ने कहा की मेरे पिताजी बहुत शराब पीते थे और घर में मारपीट करते थे मुझे बहुत गुस्सा आता था, और मै भी अपने गम मिटाने के लिए शराब पीने लग गया क्यूंकि मेरे दोस्त आसपास के लोग यही करते है.., दुःख तो मिटा नहीं बल्कि मै भी शराबी  और गरीब बन गया..और रोने लगा । दूसरे बेटे से पूछने पर उसने भी वही कहा, कि मुझे भी बहुत गुस्सा आता था कि मेरे पिता शराबी है और मारपीट करते है , आसपास के कई लोग ऐसा ही कर रहे थे, ये देखकर मैंने ठान लिया था कि मुझे अपने आप को और परिवार को इससे बाहर निकालना है । मैंने बहुत मेहनत कि...

करना है तो करना है

मै हमेशा  कहता रहता हूं कि किन आदतों को अपनाकर सफल हो सकते है , किस आदत को छोड़कर हम बेहतर हो सकते है, ये  सफल होने वाला व्यक्ति अच्छे से जानता है । परन्तु सच्चाई ये है कि 100 में से 90 ऐसे लोग जो जानते है कैसे सफल हो सकते है अपने किसी कार्य में सफल नहीं होते है । तो असल बात ये है कि जानने से कुछ नहीं होता कि सफलता कैसे मिलती है, क्यूं मिलती है । जो लोग काम करते है रिजल्ट देते है वो ही सफल माना जाता है,,  तो मुद्दा अब ये आता है सबके साथ  कि मै सोचता तो  हूं कि ये करूं पर शुरू नहीं हो पाता है , यह एक सामान्य सी बात है जो हम सबके साथ होता है कि हम करना तो बहुत कुछ चाहते है पर असल में कर नहीं पाते हैं और कुछ लोग चाहते है वो आपके देखते ही देखते पा लेते है । जैसे मुझे एक किताब पढ़ना है डिसाइड करते है, कि इसे इतने दिनों में पूरा कर लूंगा पर कुछ काम आ जाता या थोड़ा आराम करलू, या थोड़ा टीवी देख लूं या उस किताब को छोड़ के कोई और किताब पढ़ने  लग जाते है  ।  ज़िन्दगी में सफलता ऐसे हासिल नहीं कि जाती है , तो आखिर क्या बात है जो हर सफल व्यक्ति में होता है जो उ...

ज़िन्दगी को कैसे लेते है आप...

चलो आज मै दो घटना बताता हूं.. चेतावनी:  कृपया आप ऐसा मत करें   नीचे लिखे घटना से ये सीख मिलता है कि तात्कालिक दुःख सुख के आवेश में या किसी ने परिस्थिति में घबराने या  कुछ कड़ा कदम नहीं उठाना चाहिए , आखिर में  क्या बेहतर होने वाला है हमें नहीं पता रहता.. ये बात मेरे बीएससी प्रथम वर्ष की है, तब मै कुम्हारी से आना जाना करता था ,,मेरे साथ वहां का एक दोस्त सुमन यादव भी रहता  था .. उस दिन ट्रेन का लॉकडॉउन था शायद, कुछ पटरी का काम चल रहा था तो सारे लोकल रद्द थे ,,, एक्सप्रेस को लोकल बना के चला रहे थे पर  भिलाई d  या c केबिन तक ही । उस समय मेरे  में पास 20 रुपए होते थे 5 रुपए जाने के  और 5 रुपए आने के और 10 रुपए इमरजेंसी के लिए ।  जाते समय उस दिन मै अकेला ही था, टिकट लेकर एक एक्सप्रेस गाड़ी में चढ़ गया ।   वो हर लोकल स्टेशन पर रुकता रहा , पर जैसे ही कुम्हारी आने लगा उसका स्पीड बढ़ गया.. बहुत ही तेज.., और उतनी ही तेज़ी से कुम्हारी स्टेशन से निकल गया । अब मेरा सोच समझ सब बंद.., टीटी आया तो क्या बोलूंगा, पैसा क्या दूंगा .., धड़कने ...

*सही होने की आवश्यकता ??

  अधिंकाश लोग दिल की गहराई से चाहते है कि उनकी बात को सही माना जाए । बहरहाल, जब आप परवाह करना छोड़ देते हैं  कि आपकी बात को सही माना जाता है या गलत ,तो सही होने की आवश्यकता से जुड़ी सारी भावनाएं गायब हो जाती है । डॉ. जेराल्ड जेम्पल्साकी ने एक बार बहुत अच्छा सवाल पूछा था :  *" क्या आप सही साबित होना चाहते हैं या फिर आप खुश रहना चाहते है ?"* ये इतना आसान नहीं है इस खुशगहमी को छोड़ पाना ,, पर करके देखिए अच्छा लगता है । कुछ सफलताएं बाहरी नहीं बल्कि अंदरुनी होती हैं,, जो हार और जीत से तय नहीं होती ,, तुम रेस में थे ये क्या कम है । Source..🐢 #No Excuses : Brian Tracy nd my thinking शुभरात्रि ..🙂

दोस्ती की परिभाषा

एक कहानी से शुरू करते है.. बचपन के दो दोस्त थे जो स्कूल ,कॉलेज और अंत में फौज में साथ  में ही भर्ती हुए । युद्ध छिड़ गया और दोनों एक ही  यूनिट में थे ,, एक रात उन पर हमला हुआ, चारो तरफ गोलियां बरस रहीं थी । ऐसे में अंधेरे से एक आवाज आई  "अबे अरुण इधर  आ ना , मेरा मदद कर"  सुनील  ने अपने दोस्त अरुण कि आवाज फौरन पहचान ली। उसने अपने कैप्टन से पूछा : क्या मै जा सकता हूं ? कैप्टन ने जवाब दिया .." नहीं मै तुमको जाने की इजाजत नहीं दे सकता मेरे पास पहले से आदमी कम है ,मै अपने एक और आदमी को खोना नहीं चाहता । साथ ही अरुण कि आवाज से ऐसा लगता है कि वह बचेगा नहीं ।   *सुनील चुप रहा ,, फिर अरुण कि आवाज आयी,,सुनील आओ मेरी मदद करो । *सुनील चुप रहा क्योंकि कैप्टन ने उसे जाने कि इजाजत नहीं दी थी । वहीं आवाज बार बार आई ।सुनील अपने आप को और ज्यादा रोक नहीं सका और कैप्टन से कहा " कैप्टन वो मेरा बचपन का दोस्त है, मुझे उसकी मदद के लिए जाना ही होगा । कैप्टन ने बेमन से इजाजत दे दी । * सुनील अंधेरे में रेंगता गया और अरुण को अपने खड्डे में ले आया । सबने देखा कि अरुण ...

हम खुद का आकलन कम तो नहीं कर रहे !!

हम कौन है ?, हमारी अहमियत क्या है,? हमारी पहचान क्या है ,, कई बार हम अपने आपको गलत आकने लग जाते है ।इसमें हमारी गलती नहीं होती । कई बार आसपास के लोग , घर परिवार के लोग, फोकेटिया सलाहकार के कहे शब्द हमारे विचार को बहुत प्रभावित करते है । कैसे देखिए.... एक  बच्चा था 12 वी क्लास का होगा , थोड़ा कमजोर था, कई सवाल बनते नहीं था । एक दिन उसके टीचर ने उससे कहा कि तुम कुछ काम धाम करना शुरू कर लो,  क्यों टाइमपास कर रहे हो यहां । वो फिर भी पढ़ता  रहा पर अधूरे मन से और थर्ड डिवीजन से पास हुआ, फिर कई सालो तक   इधर उधर भटक कर छोटे मोटे  काम करता रहा । लगभग सात साल बाद एक ऐसे ही एक  रिसर्च स्कॉलर के द्वारा आम लोगो के आई क्यू के आकलन के दौरान उसे पता चला कि उसका आई क्यू 170 था ।  सोचो उसे क्या हुआ होगा ,, वो खुद को ज्यादा महत्वपूर्ण महसूस करने लगा , उसने किताबे लिखीं, एक सफल व्यापारी हुआ और तो और वो अंतरराष्ट्रीय मैंशा सोसायटी का चेयरमैन भी बना ।  ये घटना है विक्टर सेरिब्रायकोफ कि,, सोचिए कितने लोग हैं आपके आसपास जो ऐसे की घूम रहे है कि किसी ने क...

क्या बुरे चीजों से सीखना समय का सदुपयोग है ??

"बुरी खबर ये है कि समय उड़ता है ।  अच्छी खबर यह है कि आप ही इसके पायलट है ।  - माईकल आल्थसुलर मै बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं ,जबकि लॉक डाउन में  मेरे पास काफी समय था । हुआ यूं कि किसी दिन किसी ने मुझसे कहा कि  ये मोटिवेशनल वैगरह से कुछ नहीं होता , जिसको जो करना रहता है वहीं करता है । मै सोच में पड़ गया कि क्या सच में ऐसा होता है, मै इसी का उत्तर ढूंढने लगा  !! खैर मैंने थोड़ा विराम लेकर कुछ नया अपनी कहानी लिखने लगा । अचानक एक दिन उससे फोन में बात हुई बातें करते हुए उसने अचानक एक जगह कहा की यार तेरा एक आर्टिकल पढ़ा था बहुत पहले वो मुझे इस समय काम आया । तभी ख्याल आया कि ऐसा ही होता है ,, अच्छी चीजें कहीं ना कहीं प्रभावित करती हैं,, नहीं तो बुरी चीजें प्रभावित करने लग जाते है । क्योंकि दिमाग एक खाली उर्वर भूमि की तरह ही  है जिसमें अगर उसमे पुष्प, औषधि, फलदार, सुंदर पौधे ना लगाएं तो खरपतवार पैदा हो ही जाती हैं । कहते भी हैं खाली दिमाग शैतान का घर अगर कुछ अच्छा या रचनात्मक नहीं कर रहे हो तो कुछ शरारत  करने लग जाता है ।       ...

एक सही मदर्स डे असल में क्या होता है ??

एक घटना बताता हूं,, एक समय एक मां के तीन बच्चे थे ,तीनों  काफी होशियार और पढ़ाई में भी अच्छे थे । तीनों बहुत मेहनती थे । तीनों अपने मां से प्रेम भी बहुत करते थे।   एक समय गर्मी के दिन थे,,  कॉलेज जाते समय तीनों नई बाइक के लिए लड़ने लगे । मां ने तीनों की कुटाई कर दी । फिर आगे रोते गाते गुस्से से तीनों कॉलेज गए ।   शाम को तीनों अलग अलग आ रहे थे, क्यूंकि सुबह की पिटाई का दोष सब एक दूसरे को दे रहे थे । मां पास के नल में पानी भर रही थी ,, दो चार बाल्टियां थी ,,  बच्चों की अच्छी बात ये रहती है , खासकर जब वो अभी अभी जवान हुआ हो ,, वो बचपना गया नहीं रहता । अब जैसे ही पहला बच्चा मां के पास पहुंचा   , मां ने पूछा कैसा रहा दिन ? उस बच्चे ने कहा बेकार सुबह पिटाई तो कि थी, ऐसा बोल कर चला गया । दूसरे बच्चे से भी मां ने यही पूछा , उसने भी यही कहा कि सुबह मार पीट के भेजते हो तो दिन कैसा जाएगा और चला गया । अब आई तीसरे बच्चे की बारी वो बड़ा था , मंझला था या छोटा था मुझे नहीं पता ,, उससे भी मां ने वहीं पूछा.. वो झुंझला कर बोला , सुबह कित्ता पिटे थे,...

वो आखिरी मंजिल का कमरा.....

👘🧟‍♀ *वो आखिरी मंजिल  का कमरा*  ☠ दिनांक 11 मार्च ... मैं होली मना के घर से आया था , सोच रहा था अपना रूम बदल लूं,, बहुत दिनों से मै घर ढूंढ़ रहा था , चाह रहा था,, कि कोई अच्छा सा कमरा मिल जाए इस तरह का की बैचलर वाली लाइफ हो बस एक दो कमरा और किचन - बॉथरूम ,, एक सिंगल लड़के को और क्या चाहिए । इधर समाचार मै देख रहा था कि  देश का मौहाल भी बदल रहा  है ,, कॉरोना वायरस से संक्रमित लोग बढ़ रहे है,, लग रहा है कि कुछ दिनों में यहां भी लॉक डाउन कर देंगे । 12मार्च से लेकर 13मार्च तक ऑफिस में इतना काम आ गया कि फुरसत का टाइम हो नहीं मिला ,,  14 मार्च को छुट्टी मिला  तो मै घर ढूंढने निकल गया ,,  पूरा दिन ढूंढ़ लिया तो कोई बैचलर के नाम से नहीं दिया तो कोई शादी करके आओ बोलकर  नहीं दिया । 15 मार्च को मै फिर निकला शहर  में खूब ढूंढा पर फिर वही निराशा ,,  अब मै शहर के  कुछ बाहर कुछ पहाड़ी इलाका है हरा भरा उधर मेडिकल कॉलेज भी है उसी रोड में ऐसे ही टहलने निकल गया ,, शाम का वक्त था सूरज पहाड़ के पीछे छुप रहा था ।          क...

प्रकृति के साथ

*प्रकृति के साथ*..👣🐾 चलो एक बात पूछता हूं आज सबसे कि प्रकृति के साथ कौन चलता है  या चलने की कोशिश करते हैं? 🌿🌱🌳🎋🍃🌾🐚🐜🐛 ज्यादातर मान लेंगे कि कोशिश तो करते है पर हो नहीं पाता या हम करते है ।  मेरे कई दोस्त ऐसे भी है जो साल भर में मुश्किल से 30 दिन सुबह सूरज को उगते देखे होंगे ।सुबह के किरण को महसूस किए हो या सुबह के ओस को बिछे देखे हो ।  यकीन मानिए आप चाहे माने या नहीं हम  सबके लिए *आज के समय में ये सबसे जरूरी है ।*             यकीनन मै भी इस  जॉब में आने के बाद थोड़ी आलस से जिंदगी बिता रहा था, आराम से सोना आराम से 9 बजे तक उठना पर *जीवन में  कभी ना कभी आपको आइना दिख ही जाता है ।* मेरे साथ भी यही हुआ और जल्दी हो गया ।         कुछ दिन पहले की बात है मै जशपुर तरफ गया था एक आदमी का डोलामाइट खदान के पर्यावरण सम्मति के संबंध में जांच करने  , मै देख ही रहा था पर वो बहुत जल्द बाज़ी में था मै गुस्सा गया कि अरे यार  मै संतुष्ट होकर  ही आगे सोचूंगा तुम जल्दी जल्दी क्यों कर रहे हो !! वो तो कुछ न...