👘🧟♀ *वो आखिरी मंजिल का कमरा* ☠
दिनांक 11 मार्च ...
मैं होली मना के घर से आया था , सोच रहा था अपना रूम बदल लूं,,
बहुत दिनों से मै घर ढूंढ़ रहा था , चाह रहा था,, कि कोई अच्छा सा कमरा मिल जाए इस तरह का की बैचलर वाली लाइफ हो बस एक दो कमरा और किचन - बॉथरूम ,,
एक सिंगल लड़के को और क्या चाहिए ।
इधर समाचार मै देख रहा था कि देश का मौहाल भी बदल रहा है ,,
कॉरोना वायरस से संक्रमित लोग बढ़ रहे है,, लग रहा है कि कुछ दिनों में यहां भी लॉक डाउन कर देंगे ।
12मार्च से लेकर 13मार्च तक ऑफिस में इतना काम आ गया कि फुरसत का टाइम हो नहीं मिला ,,
14 मार्च को छुट्टी मिला तो मै घर ढूंढने निकल गया ,,
पूरा दिन ढूंढ़ लिया तो कोई बैचलर के नाम से नहीं दिया तो कोई शादी करके आओ बोलकर नहीं दिया ।
15 मार्च को मै फिर निकला शहर में खूब ढूंढा पर फिर वही निराशा ,,
अब मै शहर के कुछ बाहर कुछ पहाड़ी इलाका है हरा भरा उधर मेडिकल कॉलेज भी है उसी रोड में ऐसे ही टहलने निकल गया ,, शाम का वक्त था सूरज पहाड़ के पीछे छुप रहा था ।
कुछ आगे सुनसान जगह पहुंचकर मैंने अपनी सिगरेट जलाई और पुल के किनारे बने चबूतरे में बैठ कर पीने लगा ।
तभी पास के इमली पेड़ में कुछ हलचल हुआ लगा । आसपास मुड़ कर देखा तो कोई नहीं दिखा ,,बगुले भी शांति से सोए हुए थे उसमें पर ये उनकी आवाज नहीं थी,,
कुछ देर में फिर वही आवाज लगा कोई वहां कागज को फ़ाड़ रहा है,, थोड़ा अंधेरा होने लगा था तो मै फ़्लैश ऑन कर लिया...,
थोड़ी हिम्मत किया क्यूंकि कई बार जा चुका था वहां ।
फ़्लैश के लाइट को ऑन कर वहां गया..
मै क्या देखता हूं कि एक मकान का विज्ञापन चस्पा किया गया था, की बैचलर के लिए मकान उपलब्ध ,, आधा निकल गया था वहीं हवा से फड़फड़ा रहा था ।
जैसे ही पहुंचा उसके पास वैसे ही वो हवा में भी शांत हो गया मानो मेरा ही इंतजार कर रहा हो ..,
मैंने तुरंत नंबर मिलाया और फोन किया ,,
और उसके बताए पते : मेडिकल कॉलेज रोड में, पीपल वाली गली में माथुर रेजिडेंस ।
नाम सुन कर अच्छा लगा मै पूछते पूछते वहां पहुंच गया । वहां देखा चार मंजिला इमारत थी,, जिसकी सबसे उपरी हिस्से में के आलीशान कमरे थे ।। बिल्कुल बैचलर्स के हिसाब से ।।
वो मुझे ऊपर ले गए ..
कितना बड़ा है _ मैंने पूछा ।।
माफ़ कीजियेगा मै अभी इसका चाबी नहीं रखा हूं आपको सुबह दिखाता हूं माथुर जी ने जवाब दिया ।
सीढ़ियों से उतरते वक्त मुझे उनके जेब में चाबियों की आवाज सुनाई दे रही थी ..,
खैर रेंट वगैरह की बात हुई ,, बाकी जगह से सस्ते में था ,, अगले संडे को आऊंगा बोल कर मै चला गया ।।
21 मार्च ..
मै दोपहर को चाबी लेने चला गया । उन्होंने रूम दिखाया ,,बहुत सुन्दर , दीवालो को बहुत अच्छा सा सजाया गया था । पूरा कमरा गंदा दिखाई दे रहा था सिवाय एक चीज के ।।
किचन के अंदर एक अलमारी बस वहीं बहुत साफ दिख रही थी ,,जैसे कल ही बना हो ,, मैंने पूछा ये एकदम साफ दिख रहा है !!
माथुर जी हड़बड़ाते हुए बोले वो रामुकाका आया होगा साफ करने और इतना ही करके दूसरे काम में लग गया होगा मै देखता हूं ।
मै फिर कल आता हूं बोल कर जाने लगा..,
जब नीचे उतरने लगा.. देखा की बीच के मंजिलों में सब अपना अपना समान पैक कर रहे थे ,,
मैंने पूछा ये सब कही जा रहे है क्या??
माथुर जी बोले कि हां कोरोना वायरस के कारण इनके ऑफिस बंद हो गए है तो सब घर को निकल रहे है । शायद कल बस ट्रेन चले फिर ना चले,, देखता हूं मै भी रायपुर में रहता हूं तो आप जल्दी शिफ्ट हो जाइए ताकि मै भी निकलता ।
मै ठीक है कल आ ही जाता हूं कहके निकल गया ।।
उसी रात को मोदी जी ने घोषणा किए कि 22 मार्च को सम्पूर्ण भारत में जनता कर्फ्यू रहेगा ।
सोमवार को मै कुछ सामान लेकर तुरंत रूम में छोड़ दिया । मुझे लग रहा था कि जितना जल्दी हो सके हालत बिगड़ने से पहले मै शिफ्ट हो जाऊं ।।
दिन भर ऑफिस में व्यस्त रहा ,, शाम को जल्दी घर आ गया ताकि नए रूम में शिफ्ट हो सकूं ।
मेरे साथ मेरा चपरासी भी आया ,, वो बार बार पूछ रहा था कि कहा देखे हो सर कहके,,?
मै बोला सरप्राइज है , तू चल पहले ,, जैसे ही मै माथुर के बिल्डिंग में पहुंचा वो बोला अरे बाबा आप माथुर मकड़ा के यहां रहोगे । सर ये तो बहुत बदमाश आदमी है बहुत क्या क्या किया है बोलते है इस घर में सुना हूं ।
मै बोला चल रूम देखना और उससे मिलना अच्छा तो है ।
जैसे ही हम सामान लेकर सीढ़ियों में चढ़ने लगे ,,
दूसरे फ्लोर कि आंटी बोली आप कहा रहोगे ,,
मैंने कहा सबसे ऊपर की छत वाले कमरे में..
इतना कहना था ,, वो कुछ बोलने वाली थी पर चुप हो गई,, पीछे कमरे में खेल रहे बच्चे अपनी मम्मी के पास आ गए और मुझे ऐसे देखने लगे मुझे जैसे मै कैसे आ गया !!
खैर रूम में गया तो सारा सामान बिखरा पड़ा था ,, शायद खिड़की खुली रह गई थी , मैंने सोचा ;;
मेरा चपरासी रूम देखकर एकदम खुश हो गया कि सर बहुत अच्छा रूम है ।
हमने रूम को फिर जमाया और अब खिड़की बंद करके चला गया । अगले दिन पूरी तरह से शिफ्ट होना था ।
22 मार्च आज ऑफिस नहीं गया जनता कर्फ्यू था ,, तो नए अपने रूम में शिफ्ट नहीं हो पाया ।
अगले दिन बचा खुचा सामान लेकर शिफ्ट होने के लिए गया ।जैसे ही कमरे में गया देखा की पूरे कमरे में पानी भरा हुआ था ,, शायद साफ सफाई करने वाले ने किचन का नल खुला छोड़ दिया था ।
मैंने नल बंद किया और कुछ सफाई का सामान लेने नीचे गया ,,,
वहां देखा कि पूरी की पूरी बिल्डिंग खाली है बस सबसे नीचे पंप के पास एक अंकल खड़े थे मैंने पूछा कहा गए सब और आप कौन है !!
वो बोले मै सुंडल बाबू हूं बगल के घर में रहता हूं,, मै भी इसी पंप से पानी भरता हूं और यहां के सब लोग तो घर चले गए आज पूरे भारत में लॉकडाउन हो सकता है ना , इसीलिए ।।
तुम है सबसे ऊपर रहोगे क्या ,, तुम बहुत साहसी हों ,, कई लोग वहां आते तो है पर रुके नहीं ज्यादा ,,क्यूं कभी माथुर जी ने बताया नहीं कुछ..
शायद वहां गर्मी ज्यादा होगा ।।
ऐसा बोलकर वो हंसते चले गए ,,
खैर मै रूम को जैसे तैसे साफ सफाई किया ,,
अपना खाना बनाया ,,
और छत में टहलने लगा,, छत के करीब ही एक बहुत बड़ा आम का पेड़ था ,, बहुत पुराना लग रहा था पर उससे बहुत प्यारी और ठंडी हवा चल रही थी ।
मै उस रात जल्दी सो गया ,,
उस रात ठीक से नींद नहीं आ रहा था,, करवट बदलते बदलते 2:30 बज गए ।
नई जगह में नींद नहीं आ रहा था तो लाइट ऑन करके कुछ पढ़ने लगा ।
मुश्किल से थोड़ा सा ही पढ़ा फिर लाइट बंद करके सो गया।।
अभी सोए 5 मिनट ही हुए थे कि लगा कोई मेरे बगल में सोया है ,,
मन तो कर रहा था कि तुरंत पलट कर देखूं पर हिम्मत नहीं हुआ ,, पसीना पसीना होने लगा था,, मेरा हाथ उठा और मै अपने मोबाइल कों ढूंढने लगा ।
बिस्तर के पास ही रखा था , लाइट ऑन किया और देखा तो ऐसा कुछ था नहीं । थोड़ा अच्छा फील हुआ ,, एक गाना लगा लिया सुना धीमे आवाज में फिर सो गया ।
अब कुछ देर ही हुए था ही कोई दरवाजा पीटने लगा,,
शुरू में धीरे धीरे ..
फिर जोर जोर से..
अब अपनी तो फटी पड़ी थी ।।
खोलो ना.., हूं....
खोलो ना... हम्म....
कुछ देर शांति फिर वही सिसकना
खोलो ना..
खोलो ना.. हम्मम..
मेरा पैर मुंडी पूरा चद्दर के अंदर घुसा हुआ था,,
मन ही मन में मै माथुर जी को फोन लगा रहा था..
पर असल में चद्दर के बाहर हाथ निकालने में फट रही थी..
आखिर जाऊं तो जाऊं कहा..
साला पूरे बिल्डिंग में कोई नहीं था..
सूंडल बाबू का नंबर लिया नहीं..
और एक बात और साले ऐसे ही समय में
बाथरूम तो जरूर लगेगा..
पूरी टंकी जैसे छलक रहा हो..
कब सुबह हो ..
..*कब सुबह हो मन में यही चल रहा था*,,,
इतनी शांति कि घड़ी की टिक टिक भी सुनाई दे रही थी ।
कुछ टिक टिक के बाद..
सिसकना और बढ़ता जा रहा था ।।
खोलो ना ..
मुझे अन्दर आना है..
इस बार थोड़ा गुस्से में थी आवाज...
मेरा तो जैसे ..
हनुमान चालीसा पाठ होने लगा था..पर शुरू के दो है लाइन ही तो मुझे आता था..
बस उसी को रिपीट किए जा रहा था ,,
दरवाजे को पीटना
अचानक से बंद हो गया ..
कुछ देर सन्नाटा छाया रहा..
टिक टिक अब भी सुनाई दे रही थी..
लगा जैसे कोई छत में घूम रहा है..
फिर धीरे धीरे सीढ़ियों से नीचे उतर रही हैं.
पायल की आवाज अब भी आ रही थी..
धीरे धीरे वो आवाज कम पड़ गई..
फिर सन्नाटा..
थोड़ी हिम्मत करके ..
मोबाइल को ढूंढा..
मोबाइल को छूने पर पता चला कि मेरे हाथो में पसीना ही पसीना था..
तुरंत यूट्यूब में हनुमान चालीसा ढूंढा और फूल वाल्यूम में चलाने ही वाला था
कि
बाथरूम का नल अपने आप शुरू हो गया ..
फोन मेरे हाथो से छूट गया ..
और नीचे गिर कर हनुमान चालीसा का वीडियो चलने लगा,
उस समय दो बार , चार बार उसी को सुनता रहा,, थोड़ा हिम्मत आया ,,
तो मोबाइल में टाइम देखा ..
सवा पांच बज रहा था । उठ कर लाइट ऑन किया ,, नल बंद किया ।।
और बाथरूम से आकर सोने कि कोशिश करने लगा,, लाइट अब भी बंद नहीं था ।।
मैंने मन ही मन सोचा..
विज्ञान को ध्यान में रखकर सोचना शुरू करता हूं, ये सब कुछ नहीं होता जरूर कोई शरारत किया है मेरे साथ ,,
साइंस के नियमो को ढूंढने लग गया ,
जो कि प्रूफ करते हो कि ये घटनाएं भौतिक या केमिस्ट्री के किसी नियम से है।।
गर्मी का दिन है तो सूरज जल्दी निकल आया..
23 मार्च को आगे 21 दिनों के लिए लॉकडॉउन की घोषणा हो चुकी थी ।
समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं..
पुराने मकान मालिक को फोन किया कि वापस आऊंगा कहके..
उन्होंने मना कर दिया कि मै भी बाहर आ गया हूं । घर में कोई नहीं है अभी कहके।
मैंने लगाया माथुर को ..
कल रिसीव ही नहीं किया...
खैर ये मानव स्वभाव है कि जो चीज रात को डराती है वहीं दिन में अजीब लगती है कि शायद वो उतनी डरावनी नहीं हो ।
बिल्डिंग के नीचे गया तो वहीं सुनंडू बाबू मिले,, बोले बेटा मै 5 बजे नल चालू कर दिया था आज,, तुम पानी भर लिया करो ।
मै तुरंत उनको रात वाली बात बताई..
वो बोले बेटा ऐसा कुछ नहीं है,, हो सकता है सामने वाले रात तक मूवी देखते है उसी का आवाज आया होगा ।
ऐसा बोलने के बाद उनके आंखो में कुछ डर साफ दिख रहा था ।
फिर वो बोला आप अब कहीं नहीं जा सकते ,,
आप को ही तो देखना है सब ,,माथुर जी कुछ बताए नहीं क्या.. रूम देने के पहले..मुझसे पूछा,,
फिर खुद ही बोल उठे;शायद जल्दबाजी में भूल गए होंगे ।
आप जाइए ,, ऐसा कुछ नहीं है, नए रूम में अजीब लगता ही हैं ।
मै ऊपर आ गया ,,
उस दिन मैर पूरा दिन भर प्लांनिंग ही कर रहा था कि आज कैसे करूंगा,,
तभी ख्याल आया चपरासी को फोन करता हूं,,, उसे फोन करके मनाया कि मेरे यहां सोने आजा भाई.. या मै तेरे यहां आ जाता हूं..
वो आने के लिए तैयार हो गया ,,
उस दिन शाम को वो आ गया,,
साथ में खाना खाए और फिर मेरे रूम में ही रुका ।
उसको पिछली रात वाली घटना बताया तो वो बोला सर कुछ तो किया होगा माथुर माकड़ा बहुत बदमाश है । वैसे भी ये जगह पहले एक मंदिर था यहां कहते है बली वगैरह देते थे ।
आप डरिए मत सर वो बकरे वगैरह का ही.., खुद हंसने लगा ।
उस रात को आधे जागते,,
आधे सोते हुए रात बीतने लगा ,,
मै आज पूरा सोना चाहता था ..,
चाहता था कि कुछ पता ही ना चले सीधे सुबह हो जाए ;
उस रात लाइट ऑन था ,
सब तरफ शांति थी ,,
घड़ी की टिक टिक मुझे कुछ ज्यादा ही सुनाई दे रही थी ।
रात के लगभग 12 बजे थे कि नौकर घर्राते लेने लग गया और मै नींद को तरश रहा था ,,,
अचानक ऐसी आवाज आयी की जैसे बगल वाले आम के पेड़ में कोई कुदा हो...,
मै डर गया और तुरंत अपने चपरासी को उठाया,, वो भी तुरंत उठ क्या ..,
मैंने घटना बताया उसे..,
वो ठहरा शुद्ध देसी लड़का , निकल गया निडर होके ,, गाली देते हुए,,
अपने साथ एक डंडा भी रखा,,
और छत में चला गया।
मै अभी दरवाजे पर ही था..,
धक धक वैसे लड़कियों का होता है पर उस दिन अपना ही हो रहा था,,,
छत में जाकर और जोर जोर से गाली देने लगा कि ..
तुम लोगो की ऐसे कि तैसी और कुछ कुछ..
ऐसा सुनकर मुझमें भी हिम्मत आ गया,,मै भी छत की ओर भागा..
तो देखा ,, कुछ आदमी जो बस हाफ पैंट पहने थे। छत के किनारे से उस पार कूद रहे थे और चपरासी उसके पीछे दौड़ रहा था ।
"चोर था सर उसने कहा.."
मेरे सांस बहुत तेज से चल रहा था उस टाइम,,,
चलो भैया हो गया ,,
मै उसको खींचते खींचते अंदर ले गया, दरवाजा बंद किया और फिर सोने की कोशिश करने लगा ।
आज नींद अच्छा पड़ा..
सुबह उठा तो देखा पूरे रूम में फिर पानी भरा हुआ था..
मुझे याद नहीं को मैंने नल को खुला छोड़ दिया था या अपने आप था,,
खैर मै अब 24 मार्च से 26 मार्च तक उसी के घर सोने गया ।
पर उनके यहां जगह की कमी और रात को टॉयलेट वगैरह की समस्या के कारण मै 27 मार्च को वापस आ गया।
मै सुबह जैसे ही सीढ़ी चढ़ रहा था,, उसी समय माथुर जी का फोन आया ,,
उनको पूरी बात बता दी..
वो बोले तुम यार यंग इंडिया ऐसे बोलोगे तो कैसे चलेगा.., पढ़े लिखे हो ,, ऐसे बातो में ध्यान मत दो..,
उसने सुंधडू बाबू का नंबर दे कर उनसे हेल्प लेने और लॉक डाउन के कारण खुद आने मै असमर्थता जाहिर की ।।
मुझमें वो चोर वाली बात उजागर होने के कारण थोड़ी हिम्मत तो आ ही गई थी ।।
उस रात मै निश्चिंत होकर सोया ।
जब तक कि नल चालू नहीं हो गया ।
,, अब मुझे साइंस पर ज्यादा भरोसा था अब समझ गया था या खुद को समझा रहा था कि...ये नल की टोंटी में ही कोई दिक्कत है ।
सबसे पहले घड़ी देखा..
मोबाइल ऑन किया ..
नल फिर अचानक इस बार बंद हो गया ,,
ऐसा लगा जैसे न्यूटन का सेब वापस पेड़ में कैसे लटक गया..,
अब मै किसी दूसरे विषय मै उत्तर ढूंढने लगा ..,
कुछ देर बाद रुक रुक कर नल आने लगा..
अब कि बार..
उठा नल बन्द किया और आ गया ,,
अपने ठंडे पैर पैर चद्दर में डाले ही थे कि ..
सिसकने कि आवाज फिर आने लगी
इस बार लगा जैसे मेरे किचन से ही कोई सिसक रही है..
मानो लगा वो
रो कर मुझे बुला रही थी,,
मै सो नहीं पा रहा था,,
चाह कर भी इगनोर नहीं हो रहा था,,,
लाइट ऑन था,,
किचन का दरवाजा भी खुला था
बिस्तर से मै थोड़ा सा झांक कर देखा भी पर किचन मै कोई दिख नहीं रहा था ।।
पर ऐसा लग रहा था कि कोई रोते रोते अलमीरा को खोल रहा है और बंद कर रहा है ।
मन ही मन में मै प्रण ले लिया
.. कि भाड़ में जाए रेंट कल से मै यहां नहीं रहूंगा ,,,
कुछ देर में पूरे कमरे में मुझे पायल की आवाज सुनाई देने लगीं , हां अब ऐसा लगा जैसे मेरे बिस्तर के अगल बगल घूम रही हैं !!
मुझे लगा कि शायद मै सोया नहीं हूं ठीक से कुछ दिनों से इसलिए सुनाई से रही है ।
कुछ देर में बाहर बरसात होने लगा,,
खूब गरज रहे थे बादल..
रात ठंडी होने लगी,,
और आवाज सिर्फ बूंदों की आने लगी..
ऐसे में..
मुझे कब नींद आ गया पता ही नहीं चला ।
कुछ देर में मैंने देखा कि एक लड़की कि परछाई मेरे पास आई, उसकी आंखे और वो बहुत सुंदर थी , गुलाबी सलवार पहने हुई थी,,
और मुझे अपने हाथो से खींचकर किचन में ले गई. और अलमारी के सामने मुझे खड़ा करके उसे खोलने बोलने लगी ।
उसके सुंदरता में उदासी छुप नहीं ला रही थी..
मैंने पूछा कि क्या हुआ तो उसने मुझे अलमारी को खोलने को कहा ,,
मैंने खोला तो उसमे से उसकी आंखे मुझे हिं देख रही थी । कह रही थी मुझे मेरी आंखे दे दो ।
और तब उसके तरफ देखा तो उसकी आंखे ही नहीं थी, आंखो की जगह में सिर्फ काला पन था ।
मै आंखो को उठाने ही वाला था कि उसने मेरे हाथ पकड़ लिए..
मेरे शरीर में सिहरन सा आ गया..
मै अचंभित होकर नींद से उठ गया ,, अरे ठीक अभी सपना था.., राहत की सांस लिया..देखा तो 5 बज चुके थे और नल फिर चल रहा था ।
मै तुरंत देखने लगा कि कोई ट्रेन बस है क्या..??
देखा तो जनशताब्दी एक्सप्रेस को आज
स्पेशल बिलासपुर तक चला रहे थे,,
ऐसा लगा मानो मेरे लिए ही हो..
तुरंत मै फ्रेश होकर नहाने चला गया..
नहाने समय जैसे ही पानी डालने के लिए आंख बंद करता,, वहीं चेहरा मेरे पास बैठे दिखती और कहती मुझे मेरी आंखे दे दो ।
मै उस दिन आंख खोल कर नहाया।
फिर जल्दी जल्दी सामान पैक किया,,
ताला लगाया,,
उतरते समय मैंने कभी ध्यान नहीं दिया पर बच्चो कि हैंडराइटिंग होगी..पर कोयले से उसमे लिखा था,, "आंखे खूबसूरत है ना.."
मै घबरा गया और तुरंत संधडू बाबू के यहां गया चाभी देने,,
वहां गया तो देखा:
वो अपनी छोटी बेटी को मार रहे थे मैंने पूछा क्यों,,
मार रहे हो सुबह सुबह तो..
वो कहने लगा सर..
इसको थोड़ा कम दिखाई देता है ,,
इसलिए इसके लिए चस्मा लिया था
,ना जाने कहा गुमा आई हैं ।
जब से पता चला कि आप आए है उसी रूम में है,
वहीं ढूंढने जाऊंगी कहके कह रही थी, कहती है सपने में दीदी ने बताया है ।
अरे ये परसो रात को भी जाना चाह रही थी ,, की अलमारी में है वहां के मै ले लूंगी कहके ,, मै ही रोक दिया था क्यूंकि रात के 3 बजे थे इसको लगा कि सुबह हो गया है ।
ऐसा सुन कर मै तुरंत दौड़ते दौड़ते ऊपर गया और अलमारी को खोला देखा तो वहां एक चस्मा रखा था । अभी तक अलमारी को खोला तो था पर ठीक से देखा नहीं था ।
तुरंत चस्मा रखा और नीचे उसे देने के लिए गया । जैसे ही देकर जाने लगा तो देखा वहीं रात वाली लड़की की फोटो लगी थी । मैंने पूछा ये कौन है..
उसने कहा इसकी बड़ी बहन है..
कुछ वर्ष पहले छत में घूम रही थी तो आम तोड़ने के चक्कर में गिर गई थी। सर में बहुत चोट आया था तो बच नहीं पाई ।
इतना सुनना था कि..
मै तुरंत उनको चाभी दिया और दौड़ते दौड़ते रेलवे स्टेशन चला गया..
वो आखिरी ट्रेन था पर उस में कोई यात्री था ही नहीं।
मैंने टिकट कटाया और बोगी में चढ़ गया ,, पूरा बोगी खाली ,, मैंने पूछा तो टी टी बताया की एक दो लोग आगे के स्टेशन में बैठेंगे ।
बाकी कोराना वायरस के कारण ज्यादा सवारी नहीं है ।
कुछ देर में ट्रेन छूट गई... मै चैन कि सांस लिया,,
और सो गया ,
कुछ देर बाद वही पायल कि आवाज मुझे फिर सुनाई देने लगा ,, और वो आवाज और करीब आने लगी ।
मै जग गया देखा तो गाड़ी अगले स्टेशन में खड़ी थी और मेरे सामने एक लड़की मुझे टक लगाकर कुछ पूछ रही थी।
मुझे वो आगे जाने बोल रही थी कि उनकी सीट है ये ।
मै एक टक उसे देखता रहा , उसकी आंखे कुछ वैसे ही थी और फिर उससे कहा पूरी ट्रेन खाली है आप कही भी बैठ जाइए ।
वो मुस्कुराई और बोली..
लगता है आपने किसी को आंखे दी है
और ऐसा कहते हुए अगले सीट में बैठ गई , बैठते समय वो थोड़ा हड़बड़ा रही थी ।
मै तो और हड़बड़ा गया ,, अरे आपको कैसे पता !!
वो बोली: आपकी आंखे और बाते बता रही हैं , की आप सोए नहीं हो..,
मै बोला: हां ट्रेन पकड़ने की जल्दी थी ना इसलिए..,,जल्दी से ऐसा बता कर , तुरंत मै आंख बंद करके सोने की कोशिश करने लगा ।
कुछ देर बाद वो बोली आपने आंखे ही क्यूं दी..आपके पास तो बहुत कुछ होगा ।
ऐसा कहकर वो मुस्करा रही थी ।जैसे वो सब जानती हो ,,
हो सकता है वो रोमांटिक हो रही थी..,
पर मै उठा और कुछ देर अगल बगल देखा.
मैंने पाया की कि ट्रेन फूल स्पीड में थी ।
मै दुबक कर फिर बैठ कर ..
और आंखे बंद करके सोने लगा..
वो कुछ देर मुझे देखी फिर अपने मोबाइल गाना सुने लगी..,
मै सो गया..
उठा तो देखा ट्रेन स्टेशन में खड़ी थी..,
एक भाई साहब ने मुझे उठाया..उठो स्टेशन आ गया है, ट्रेन को सनिटाइज करना है ।
मै उठा और उससे बोला अरे यहां एक लड़की थी..उसने बताया नहीं मुझे ,,
अरे उसे उसके मम्मी पापा लेने आए थे ,,
वो बेचारी देख नहीं सकती ना ।
मै बोला वो तो मोबाइल चला रही थी मै देखा,,
अरे नहीं वो बस गाना सुनती है और कॉल करती है,, ऐसा बता रहे थे उनके पापा,, उस भाई साहब ने कहा,,
अब तुम जाओ,,
मै सुनसान स्टेशन में उसी को ढूंढ़ रहा था ,
बाहर भी कोई नहीं मिला,,
कुछ देर में मेरा दोस्त आ गया और मै गंतव्य को निकल गया ।।
Sun na bhai story bahut mast hai.. raat me hi padh liya ... Ab mai kaise sou..??😰😰
ReplyDelete👌👌👌👌
Try it..it's not true
ReplyDelete*ये मेरी लिखित कहानी है,, किसी भी घटना ,जगह या समय से इसका कोई सम्बन्ध नहीं है । अगर ऐसा होता है तो उसे मात्र एक संयोग कहा जाएगा ।*😄
ReplyDeleteअगर आप डरते है तो कृपया सुबह पढ़े,,,