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Showing posts from May, 2020

हम खुद का आकलन कम तो नहीं कर रहे !!

हम कौन है ?, हमारी अहमियत क्या है,? हमारी पहचान क्या है ,, कई बार हम अपने आपको गलत आकने लग जाते है ।इसमें हमारी गलती नहीं होती । कई बार आसपास के लोग , घर परिवार के लोग, फोकेटिया सलाहकार के कहे शब्द हमारे विचार को बहुत प्रभावित करते है । कैसे देखिए.... एक  बच्चा था 12 वी क्लास का होगा , थोड़ा कमजोर था, कई सवाल बनते नहीं था । एक दिन उसके टीचर ने उससे कहा कि तुम कुछ काम धाम करना शुरू कर लो,  क्यों टाइमपास कर रहे हो यहां । वो फिर भी पढ़ता  रहा पर अधूरे मन से और थर्ड डिवीजन से पास हुआ, फिर कई सालो तक   इधर उधर भटक कर छोटे मोटे  काम करता रहा । लगभग सात साल बाद एक ऐसे ही एक  रिसर्च स्कॉलर के द्वारा आम लोगो के आई क्यू के आकलन के दौरान उसे पता चला कि उसका आई क्यू 170 था ।  सोचो उसे क्या हुआ होगा ,, वो खुद को ज्यादा महत्वपूर्ण महसूस करने लगा , उसने किताबे लिखीं, एक सफल व्यापारी हुआ और तो और वो अंतरराष्ट्रीय मैंशा सोसायटी का चेयरमैन भी बना ।  ये घटना है विक्टर सेरिब्रायकोफ कि,, सोचिए कितने लोग हैं आपके आसपास जो ऐसे की घूम रहे है कि किसी ने क...

क्या बुरे चीजों से सीखना समय का सदुपयोग है ??

"बुरी खबर ये है कि समय उड़ता है ।  अच्छी खबर यह है कि आप ही इसके पायलट है ।  - माईकल आल्थसुलर मै बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं ,जबकि लॉक डाउन में  मेरे पास काफी समय था । हुआ यूं कि किसी दिन किसी ने मुझसे कहा कि  ये मोटिवेशनल वैगरह से कुछ नहीं होता , जिसको जो करना रहता है वहीं करता है । मै सोच में पड़ गया कि क्या सच में ऐसा होता है, मै इसी का उत्तर ढूंढने लगा  !! खैर मैंने थोड़ा विराम लेकर कुछ नया अपनी कहानी लिखने लगा । अचानक एक दिन उससे फोन में बात हुई बातें करते हुए उसने अचानक एक जगह कहा की यार तेरा एक आर्टिकल पढ़ा था बहुत पहले वो मुझे इस समय काम आया । तभी ख्याल आया कि ऐसा ही होता है ,, अच्छी चीजें कहीं ना कहीं प्रभावित करती हैं,, नहीं तो बुरी चीजें प्रभावित करने लग जाते है । क्योंकि दिमाग एक खाली उर्वर भूमि की तरह ही  है जिसमें अगर उसमे पुष्प, औषधि, फलदार, सुंदर पौधे ना लगाएं तो खरपतवार पैदा हो ही जाती हैं । कहते भी हैं खाली दिमाग शैतान का घर अगर कुछ अच्छा या रचनात्मक नहीं कर रहे हो तो कुछ शरारत  करने लग जाता है ।       ...

एक सही मदर्स डे असल में क्या होता है ??

एक घटना बताता हूं,, एक समय एक मां के तीन बच्चे थे ,तीनों  काफी होशियार और पढ़ाई में भी अच्छे थे । तीनों बहुत मेहनती थे । तीनों अपने मां से प्रेम भी बहुत करते थे।   एक समय गर्मी के दिन थे,,  कॉलेज जाते समय तीनों नई बाइक के लिए लड़ने लगे । मां ने तीनों की कुटाई कर दी । फिर आगे रोते गाते गुस्से से तीनों कॉलेज गए ।   शाम को तीनों अलग अलग आ रहे थे, क्यूंकि सुबह की पिटाई का दोष सब एक दूसरे को दे रहे थे । मां पास के नल में पानी भर रही थी ,, दो चार बाल्टियां थी ,,  बच्चों की अच्छी बात ये रहती है , खासकर जब वो अभी अभी जवान हुआ हो ,, वो बचपना गया नहीं रहता । अब जैसे ही पहला बच्चा मां के पास पहुंचा   , मां ने पूछा कैसा रहा दिन ? उस बच्चे ने कहा बेकार सुबह पिटाई तो कि थी, ऐसा बोल कर चला गया । दूसरे बच्चे से भी मां ने यही पूछा , उसने भी यही कहा कि सुबह मार पीट के भेजते हो तो दिन कैसा जाएगा और चला गया । अब आई तीसरे बच्चे की बारी वो बड़ा था , मंझला था या छोटा था मुझे नहीं पता ,, उससे भी मां ने वहीं पूछा.. वो झुंझला कर बोला , सुबह कित्ता पिटे थे,...