एक घटना बताता हूं,,
एक समय एक मां के तीन बच्चे थे ,तीनों काफी होशियार और पढ़ाई में भी अच्छे थे । तीनों बहुत मेहनती थे । तीनों अपने मां से प्रेम भी बहुत करते थे।
एक समय गर्मी के दिन थे,, कॉलेज जाते समय तीनों नई बाइक के लिए लड़ने लगे । मां ने तीनों की कुटाई कर दी । फिर आगे रोते गाते गुस्से से तीनों कॉलेज गए ।
शाम को तीनों अलग अलग आ रहे थे, क्यूंकि सुबह की पिटाई का दोष सब एक दूसरे को दे रहे थे ।
मां पास के नल में पानी भर रही थी ,,
दो चार बाल्टियां थी ,,
बच्चों की अच्छी बात ये रहती है , खासकर जब वो अभी अभी जवान हुआ हो ,, वो बचपना गया नहीं रहता ।
अब जैसे ही पहला बच्चा मां के पास पहुंचा , मां ने पूछा कैसा रहा दिन ?
उस बच्चे ने कहा बेकार सुबह पिटाई तो कि थी, ऐसा बोल कर चला गया ।
दूसरे बच्चे से भी मां ने यही पूछा ,
उसने भी यही कहा कि सुबह मार पीट के भेजते हो तो दिन कैसा जाएगा और चला गया ।
अब आई तीसरे बच्चे की बारी वो बड़ा था , मंझला था या छोटा था मुझे नहीं पता ,,
उससे भी मां ने वहीं पूछा..
वो झुंझला कर बोला , सुबह कित्ता पिटे थे,
तब ख्याल नहीं आया ।
इतना कहा और दिखाओ इन दो बाल्टियोंको मै ले जाता हूं कहके पानी ले गया ।
मां मुस्कुरा रही थी ,,शाम को सभी के लिए खीर पूड़ी बनाई ।सबने चाव से खाया ।
मां को सबसे अच्छा अहसास किस बच्चे ने कराया । यकीनन तीसरे बेटे ने , नादानियां तो उसमे भी थी पर असल मायने में सही बेटा वहीं है उसका ।आप भी अपने मम्मी पापा के लिए दिल से अच्छा बेटा या बेटी बने, अपने कर्मो से बेहतर बने उनके लिए आप सब कुछ है उनके शब्दों का अहमियत समझे, फिर शब्दों से भी उनके लिए मीठे बने । क्यूंकि आपका व्यवहार आपके शब्दों से ज्यादा बोलते है , वो कभी कहते नहीं पर हमेशा उनका जीवन आपके लिए ही होता है । इसी सोच के साथ हर पल , हर समय ,हर सुख ,और दुख में मातृ शक्ति से बड़ा दूसरा कोई नहीं,, एक दिन काफी नहीं उनके सम्मान के लिए ।
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