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Showing posts from August, 2020

शराबी के बेटा कैसे बना कलेक्टर !!

एक पुरानी घटना है  शायद मध्य प्रदेश का है,  वहां एक शराबी के दो बेटे थे , वो शराबी अपने बेटे और पत्नि को बहुत मारता था,  घर में लड़ाई आम बात थी,, और ज्यादा कुछ काम धाम नहीं करता था । कई साल बीत गए और उनके दोनों बेटों में से एक बेटा  कलेक्टर बन गया  और दूसरा बेटा अपने पिता की तरह शराबी हो गया । तब किसी समाचार वाले को पता चला तो उनके यहां इंटरव्यू लेने पहुंचा । और उसने पूछा दोनों से कि आप लोगो ऐसे कैसे और क्यों बने .. * एक शराबी तो एक कलेक्टर* तो शराबी बेटे ने कहा की मेरे पिताजी बहुत शराब पीते थे और घर में मारपीट करते थे मुझे बहुत गुस्सा आता था, और मै भी अपने गम मिटाने के लिए शराब पीने लग गया क्यूंकि मेरे दोस्त आसपास के लोग यही करते है.., दुःख तो मिटा नहीं बल्कि मै भी शराबी  और गरीब बन गया..और रोने लगा । दूसरे बेटे से पूछने पर उसने भी वही कहा, कि मुझे भी बहुत गुस्सा आता था कि मेरे पिता शराबी है और मारपीट करते है , आसपास के कई लोग ऐसा ही कर रहे थे, ये देखकर मैंने ठान लिया था कि मुझे अपने आप को और परिवार को इससे बाहर निकालना है । मैंने बहुत मेहनत कि...

करना है तो करना है

मै हमेशा  कहता रहता हूं कि किन आदतों को अपनाकर सफल हो सकते है , किस आदत को छोड़कर हम बेहतर हो सकते है, ये  सफल होने वाला व्यक्ति अच्छे से जानता है । परन्तु सच्चाई ये है कि 100 में से 90 ऐसे लोग जो जानते है कैसे सफल हो सकते है अपने किसी कार्य में सफल नहीं होते है । तो असल बात ये है कि जानने से कुछ नहीं होता कि सफलता कैसे मिलती है, क्यूं मिलती है । जो लोग काम करते है रिजल्ट देते है वो ही सफल माना जाता है,,  तो मुद्दा अब ये आता है सबके साथ  कि मै सोचता तो  हूं कि ये करूं पर शुरू नहीं हो पाता है , यह एक सामान्य सी बात है जो हम सबके साथ होता है कि हम करना तो बहुत कुछ चाहते है पर असल में कर नहीं पाते हैं और कुछ लोग चाहते है वो आपके देखते ही देखते पा लेते है । जैसे मुझे एक किताब पढ़ना है डिसाइड करते है, कि इसे इतने दिनों में पूरा कर लूंगा पर कुछ काम आ जाता या थोड़ा आराम करलू, या थोड़ा टीवी देख लूं या उस किताब को छोड़ के कोई और किताब पढ़ने  लग जाते है  ।  ज़िन्दगी में सफलता ऐसे हासिल नहीं कि जाती है , तो आखिर क्या बात है जो हर सफल व्यक्ति में होता है जो उ...

ज़िन्दगी को कैसे लेते है आप...

चलो आज मै दो घटना बताता हूं.. चेतावनी:  कृपया आप ऐसा मत करें   नीचे लिखे घटना से ये सीख मिलता है कि तात्कालिक दुःख सुख के आवेश में या किसी ने परिस्थिति में घबराने या  कुछ कड़ा कदम नहीं उठाना चाहिए , आखिर में  क्या बेहतर होने वाला है हमें नहीं पता रहता.. ये बात मेरे बीएससी प्रथम वर्ष की है, तब मै कुम्हारी से आना जाना करता था ,,मेरे साथ वहां का एक दोस्त सुमन यादव भी रहता  था .. उस दिन ट्रेन का लॉकडॉउन था शायद, कुछ पटरी का काम चल रहा था तो सारे लोकल रद्द थे ,,, एक्सप्रेस को लोकल बना के चला रहे थे पर  भिलाई d  या c केबिन तक ही । उस समय मेरे  में पास 20 रुपए होते थे 5 रुपए जाने के  और 5 रुपए आने के और 10 रुपए इमरजेंसी के लिए ।  जाते समय उस दिन मै अकेला ही था, टिकट लेकर एक एक्सप्रेस गाड़ी में चढ़ गया ।   वो हर लोकल स्टेशन पर रुकता रहा , पर जैसे ही कुम्हारी आने लगा उसका स्पीड बढ़ गया.. बहुत ही तेज.., और उतनी ही तेज़ी से कुम्हारी स्टेशन से निकल गया । अब मेरा सोच समझ सब बंद.., टीटी आया तो क्या बोलूंगा, पैसा क्या दूंगा .., धड़कने ...

*सही होने की आवश्यकता ??

  अधिंकाश लोग दिल की गहराई से चाहते है कि उनकी बात को सही माना जाए । बहरहाल, जब आप परवाह करना छोड़ देते हैं  कि आपकी बात को सही माना जाता है या गलत ,तो सही होने की आवश्यकता से जुड़ी सारी भावनाएं गायब हो जाती है । डॉ. जेराल्ड जेम्पल्साकी ने एक बार बहुत अच्छा सवाल पूछा था :  *" क्या आप सही साबित होना चाहते हैं या फिर आप खुश रहना चाहते है ?"* ये इतना आसान नहीं है इस खुशगहमी को छोड़ पाना ,, पर करके देखिए अच्छा लगता है । कुछ सफलताएं बाहरी नहीं बल्कि अंदरुनी होती हैं,, जो हार और जीत से तय नहीं होती ,, तुम रेस में थे ये क्या कम है । Source..🐢 #No Excuses : Brian Tracy nd my thinking शुभरात्रि ..🙂

दोस्ती की परिभाषा

एक कहानी से शुरू करते है.. बचपन के दो दोस्त थे जो स्कूल ,कॉलेज और अंत में फौज में साथ  में ही भर्ती हुए । युद्ध छिड़ गया और दोनों एक ही  यूनिट में थे ,, एक रात उन पर हमला हुआ, चारो तरफ गोलियां बरस रहीं थी । ऐसे में अंधेरे से एक आवाज आई  "अबे अरुण इधर  आ ना , मेरा मदद कर"  सुनील  ने अपने दोस्त अरुण कि आवाज फौरन पहचान ली। उसने अपने कैप्टन से पूछा : क्या मै जा सकता हूं ? कैप्टन ने जवाब दिया .." नहीं मै तुमको जाने की इजाजत नहीं दे सकता मेरे पास पहले से आदमी कम है ,मै अपने एक और आदमी को खोना नहीं चाहता । साथ ही अरुण कि आवाज से ऐसा लगता है कि वह बचेगा नहीं ।   *सुनील चुप रहा ,, फिर अरुण कि आवाज आयी,,सुनील आओ मेरी मदद करो । *सुनील चुप रहा क्योंकि कैप्टन ने उसे जाने कि इजाजत नहीं दी थी । वहीं आवाज बार बार आई ।सुनील अपने आप को और ज्यादा रोक नहीं सका और कैप्टन से कहा " कैप्टन वो मेरा बचपन का दोस्त है, मुझे उसकी मदद के लिए जाना ही होगा । कैप्टन ने बेमन से इजाजत दे दी । * सुनील अंधेरे में रेंगता गया और अरुण को अपने खड्डे में ले आया । सबने देखा कि अरुण ...