अधिंकाश लोग दिल की गहराई से चाहते है कि उनकी बात को सही माना जाए । बहरहाल, जब आप परवाह करना छोड़ देते हैं कि आपकी बात को सही माना जाता है या गलत ,तो सही होने की आवश्यकता से जुड़ी सारी भावनाएं गायब हो जाती है ।
डॉ. जेराल्ड जेम्पल्साकी ने एक बार बहुत अच्छा सवाल पूछा था :
*" क्या आप सही साबित होना चाहते हैं या फिर आप खुश रहना चाहते है ?"*
ये इतना आसान नहीं है इस खुशगहमी को छोड़ पाना ,, पर करके देखिए अच्छा लगता है ।
कुछ सफलताएं बाहरी नहीं बल्कि अंदरुनी होती हैं,, जो हार और जीत से तय नहीं होती ,, तुम रेस में थे ये क्या कम है ।
#No Excuses : Brian Tracy nd my thinking
शुभरात्रि ..🙂
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