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ज़िन्दगी को कैसे लेते है आप...

चलो आज मै दो घटना बताता हूं..

चेतावनी:  कृपया आप ऐसा मत करें

 
नीचे लिखे घटना से ये सीख मिलता है कि तात्कालिक दुःख सुख के आवेश में या किसी ने परिस्थिति में घबराने या  कुछ कड़ा कदम नहीं उठाना चाहिए , आखिर में  क्या बेहतर होने वाला है हमें नहीं पता रहता..


ये बात मेरे बीएससी प्रथम वर्ष की है,
तब मै कुम्हारी से आना जाना करता था ,,मेरे साथ वहां का एक दोस्त सुमन यादव भी रहता  था ..

उस दिन ट्रेन का लॉकडॉउन था शायद, कुछ पटरी का काम चल रहा था तो सारे लोकल रद्द थे ,,,


एक्सप्रेस को लोकल बना के चला रहे थे पर  भिलाई d  या c केबिन तक ही ।

उस समय मेरे  में पास 20 रुपए होते थे 5 रुपए जाने के  और 5 रुपए आने के और 10 रुपए इमरजेंसी के लिए । 

जाते समय उस दिन मै अकेला ही था, टिकट लेकर एक एक्सप्रेस गाड़ी में चढ़ गया ।
 

वो हर लोकल स्टेशन पर रुकता रहा , पर जैसे ही कुम्हारी आने लगा उसका स्पीड बढ़ गया.. बहुत ही तेज.., और उतनी ही तेज़ी से कुम्हारी स्टेशन से निकल गया ।

अब मेरा सोच समझ सब बंद.., टीटी आया तो क्या बोलूंगा, पैसा क्या दूंगा ..,

धड़कने तेज और ट्रेन की रफ्तार  बढ़ने लगी..

 पर जैसे जैसे ट्रेन सरस्वती नगर के समीप पहुंची कुछ धीरे होने लगी ,,, 

और मै कूद गया,, चलती ट्रेन से..,पता नहीं क्या हुआ डर था, या कुछ और पर मै कूद गया ..

थोड़ा चोट लगा था हाथ में छील गया था कुछ..  और दर्द बहुत कर रहा था, वो बगल मै लटकाने  वाला बैग था तो और  कूदते नहीं बना था,,

*सबसे अच्छा ये हुआ कि मै ट्रेन के नीचे नहीं आया* और फिर एकदम उदास से,
 पैदल वहां ब्रिज के पास, में ही मॉल के पास पैदल गया और ऑटो पकड़ कर घर आ गया । 

घर में उस समय दादी अम्मा आई हुई थी उनको कुछ बताया नहीं पर अपनी तो फटी पड़ी थी , आज तो मरते मरते बचा था , चुपचाप बिना कुछ पढ़े लिखे सो गया उस दिन ।


अगले दिन सुबह ट्रेन में सुमन से मिला पूछा कहा था कल दिखा नहीं कहके .. 

उसने कहा मत पूछ भाई कल तो फिल्मी स्टोरी चल रहा था लाइफ में.. और हंसने लगा , मै भी मन में सोच रहा था मै भी तो स्टंट करके बैठा हूं ।🙄

खैर उसने है बताया  उसे सुन कर दिन भर हंसते रहे हम ..


एक्चुअली वो भी उसी ट्रेन में था ,
आगे या पीछे , उसने टिकट नहीं लिया था क्यों कि कॉपी महंगा पड़ा थोड़ा तो उसने टिकट के पैसे भी मिला लिया था और लेट भी हो गया था ।

खैर वो दौड़ते दौड़ते जिस बोगी में चढ़ा था उसी में टी टी मिल गया उसे और उसने उसे पकड़ भी लिया ।

उसके पास पैसे तो थे नहीं ना ही टिकट थे .
टी टी ने कहा कि तुमको अंदर कर दूंगा , बिना टिकट के चढ़ा है, तो वो बोला कि देखिए सर मेरे पास पैसे नहीं है, मै कॉलेज स्टूडेंट हूं और इस कारण से पैसे खत्म हो गए । टी टी ने उसकी एक भी बात नहीं सुनी और उसे बैठा दिया वो चुपचाप बैठा रहा और कहता सर मुझे कोई दिक्कत नहीं है अब पैसे ही नहीं है बचे तो क्या करूं,, टी टी उसे बहुत चमकाया , सबके सामने ।


दुर्ग से  वो वैसे ही रायपुर स्टेशन में  टी टी बोले कि की जा  यहां उतर जा कहके, तो  उसने साफ मना कर दिया ,,

और कहा सर मेरे पास पैसे ही नहीं है मै अब आप ही के साथ जाऊंगा यहां से कैसे घर जा पाऊंगा । 

ये ट्रेन कोलकाता जाएगा वहीं से कल आएगा ये ट्रेन तो आ जाऊंगा या आपके पास रह लूंगा , आपही तो मुझे रोक रखे है । ये आपके ही कारण हुआ है। 

ऐसा सुन के टी टी ने उसे 50 रुपए दिए और कहा जा भाई इससे ऑटो करके घर चले जा ।

और वो घर आ गया , और रास्ते में कुछ पैसे से बढ़िया नाश्ता भी किया । ऐसा बताते और लोटपोट होते उस दिन हमलोग कॉलेज पहुंचे ।

*यही होता है ,  हम जिस परिस्थिति में रहते है उसी परिस्थिति में कई और लोग भी रहते है । कुछ लोग  गलत कदम उठा लेते है जैसे मैंने किया जिसके जीवन दांव में लग जाता है और कुछ लोग समय को समय देते है, सब्र करते है, खुद पर भरोसे को टूटने नहीं देते और समझदारी से काम लेते है और बाज़ी वहीं पलटते है ।*

है ना ..


और इसके बाद हां सुमन के इस घटना ने मुझे इतना कॉन्फिडेंट दे दिया या कहे ओवर कॉन्फिडेंस कि मै क्या बताऊं अगले महीने जब मै दुर्ग में शिफ्ट हुआ तो लोकल ट्रेन में अपने साइकिल को चढ़ाकर दुर्ग ला लिया ।

अब वो दिन याद करता हूं तो अचंभित हो जाता हूं की मै भी कितना गलत था और ऐसे वैसे रिस्क ले लेता था ।


*यकीन मानिए जीवन में  अंतिम पल कुछ नहीं होता ,,, आप जब हार जाते हो, आप जब टूट जाते हो.., आप जब सबसे पीछे हो जाते हो..
             ....तब आप किसी और चीज के तैयार हो जाते  हो बस रुकना नहीं है । जीवन में तो कमियां और बेवकूफियां हिस्से में होनी चाहिए तभी तो जब कभी अकेले बैठोगे तो याद करके मुस्कुरा पाओगे ,, जीवन में कभी कोई गलत कदम ना उठाए क्यूंकि ज़िन्दगी बड़ी अजीब है अगले ही पल बदल सकती है और इसे देखने के लिए जीना बहुत जरूरी है । 
*यकीन मानिए चमत्कार होते है ।*

#मेरा अनुभव...🐢..🙂..

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