कुछ दिन पहले मैंने एक आर्टिकल पढ़ा कि खुशी कि असली एहसास क्या है उस बारे में । उसके पढ़ते पढ़ते मुझे ये कहानी याद आई कि खुशियां असल में होती कहा है और हम ढूंढते कहा है ।
चलिए शुतुरमुर्ग के बारे में एक बात बताता हूं , असल में होता ऐसा है कि कहते है जब शुतुरमुर्ग के पीछे कोई शिकारी पड़ जाता है तो वो भागने के बजाय अपना सिर रेत में घुसा देता है और उसको लगता है कि सब तरफ अंधेरा छा गया अब वो सुरुक्षित है ।
*हैं ना ये बेवकूफी वाली बात*
पर पता है कहीं ना कहीं हम लोग भी ऐसे ही है । हम अपनी खुशियां उन चीज़ों में खोजते रहते है जो हमारे आसपास सब अच्छा दिखाता है जबकि असल में ऐसा नहीं होता है ।
मैंने देखा कि एक लड़का आज पार्टी करता है जबकि पता है कि उसका कल पेपर है, पूछने पर भाई का जन्मदिन बार बार नहीं आता ,यही है शुतुरमुर्ग वाली खुशी पेपर बिगड़ने के बाद एहसास होता है असली खुशी कहा है , क्यूंकि कई बार जिसका बर्थडे था वो पास हो जाए , यकीन मानिए बीएससी 2nd ईयर में ऐसा देखा है मैंने ।
किसी ने उस टाइम कहा मुझे अरे यार कस्ती को तूफानों में निकलने का अलग ही मजा है इसलिए एक रात में पढ़कर निकालेंगे पर ये वही बात है शुतुरमुर्ग वाली खुशी क्यूंकि किसीको नहीं पता कि उस दिन मौसम , लाइट, तबीयत कैसी रहेगी ।
कुछ लड़कियों को देखा मैंने की खाना बनाने से अच्छा है चलो आज पिज़्ज़ा खा लेते है हफ्ते में कई दिन ये है शुतुरमुर्ग वाली खुशी , पीएससी की तैयारी कर रहे है और हर हफ्ते शराब पार्टी ये है ....
मेरा एक दोस्त है जिसकी शादी हो गई है मैंने देखा एक दिन वह दोस्तो के साथ पार्टी कर रहा है जबकि वह सिर्फ अपने वाइफ के साथ रहता है वो अकेली उसका इंतज़ार कर रही हैं यहां उसकी खुशी शुतुरमुर्ग वाली ही खुशी है ना , उसे मन के कहीं कोने में लग रहा है कि उसे वाइफ के साथ होना चाहिए पर वो अब भी दोस्तो के साथ ही है ।
लगभग कई सालो से मै बिलासपुर आ रहा हूं जो कि राज्य पीएससी के लिए हब है, सोचता हूं की कई लोग एक दो साल में कुछ बन जाते हैं किस्मत अच्छी है पर कुछ लोग कई सालो से लगे हुए है, पर कुछ हुआ क्यूं नहीं !!
कहीं ये शुतुरमुर्ग वाली खुशी के कारण तो नहीं , ज्यादातर यही पाया कि लोग जिस समय दौड़ना था अपने लक्ष्य के लिए उस समय सिर को रेट के नीचे कर के खुद को खुश करने लग जाते है । असल में ज्यादा ज्ञान प्राप्त कर हमको जितना ज्यादा जिम्मेदार बनना चाहिए उसके बजाय उतने ही लापरवाह बनते देखा है वहा लोगो को ..!!
हो सकता है कि वो ऐसा डिप्रेशन से बचने के लिए करते हो , पर किसी तरह का एक्सक्यूज देना सही नहीं ।
ऐसा नहीं है कि मैंने नहीं की मै तो सबसे बड़ा शुतुरमुर्ग था लगता है ,मैंने भी कई बार किया है ।
*असल बात*
सबको ये लग रहा होगा किं असल में मै कहना क्या चाह रहा हूं , क्यूंकि पार्टी करना ,दोस्तो के साथ समय बिताना, थोड़ा एन्जॉय करना गलत तो नहीं??
तो बात कुछ और नहीं बस आपके लाइफ में हमेशा तीन ऑप्शन रहते है
१. नजरअंदाज कर दो
२.दूसरा भाग जाना
३. जिम्मेदारी कबूल करना
मै यहां किसी दोस्त के साथ लड़ाई में भाग लेने को नहीं कह रहा बल्कि खुद के लिए जिम्मेदार होने को कह रहा हूं ।
ज्यादातर लोग खुद के लिए जिम्मेदार हुए बिना आराम से जिंदगी बीते ये सोच में रहना पसंद करते हैं पर जिम्मेदारी कबूल करने का खतरा उठाना पड़ता है , जवाबदेह होना पड़ता है ।
हमे हर गलती से सीखना ही होगा क्यूंकि अपने लिए कोई और जवाबदार नहीं होगा । बाद में खुद को या किसी को दोष नहीं दे सकते क्यूंकि शुतुरमुर्ग बनना खुद का निर्णय होता है कोई दूसरा ये नहीं करता ।
दोस्ती करिए , पार्टी करिए , घूमिए जो करना है करिए पर जिम्मेदार होकर करिए ।
देश के लिए बाद में, घर के लिए बाद में, दोस्त के लिए बाद ने..
पहले खुद के लिए जिम्मेदार बने बाकी के लिए अपने आप हो जाएगा ।
अच्छे चीज़ों के लिए जिम्मेदार बने बुरे काम के लिए नहीं , शिकारी हर तरफ हो सकते है
आपका जॉब की चाहत..
अच्छा जीवनसाथी..
अच्छा भविष्य..
कोई एग्जाम निकालना..
बहुत सारे है पर आपको दौड़ना ही होगा...रेत में सिर नहीं दे सकते है ना।
*वह चांदनी रातो में सोया..*
*उसने सुनहरी धूप का मजा उठाया..*
*कुछ करने की तैयारी में जिंदगी गुजारकर..*
*वह गुजर गया कुछ ना कर - हारकर ।*
_ *जेम्स अलबरी*
Hav a nice day..
पता है ये कछुआ क्यू डालता हूं हर पेज में ??
_ क्यूंकि ये सोया नहीं देर हुए पर रुका नहीं , कहानी जानते हो ना । मै सोचा था कि शायद कोई पूछेगा....
Source:
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Thank u🐢
Great ...realhappiness
ReplyDeleteThanks, visit other articles also
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