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जो अच्छा लगे वो करो .क्या ये सही है ??


एक मां दिनभर काम करने के बाद घर आती है , फिर घर के कामकाज निपटाती है , बच्चे की देखभाल करती है और थक हार  कर सो जाती है । आधी रात को बच्चा रोने लगता है । ऐसे में थक कर सोई मां को क्या उठना चाहेगी ? नहीं फिर भी वह उठती हैं । क्यों?


तीन  वजह हो सकती हैं-
- प्यार
- फ़र्ज़
- जिम्मेदारी

हम जिंदगी सिर्फ भावनाओ के सहारे नहीं गुजार सकते । हमे खुद पर नियंत्रण , अनुशासन की जरूरत हर उम्र में होती हैं ।
चाहे आप पढ़ रहे हो या शादीशुदा हो ।


जिंदगी में आज के समय में इतनी आपाधापी ,या खुद के लिए समय नहीं निकाल पाने की शिकायत इसीलिए है क्यूंकि हम अपनी इच्छाओं के सामने खुटना टेक देते हैं । ऐसा नहीं है कि मेरे साथ नहीं होता सबके साथ होता है ।  मै रोज 11 बजे सोने का सोचता हूं 12 एक  बज ही जाता हैं पर सुबह  समय में उठना ही होता है पर क्यूंकि ये जरूरी है ।


अनुशासन ही आजादी देता हैं , लोगो के मन में यह गलत धारणा है कि आजादी का मतलब मनमुताबिक काम करने से होता है । हमारी  इच्छाएं हमेशा पूरी नहीं हो सकती ।

जीवन में जितने लोगो को सफलता मिली है चाहे वो पढ़ाई में, संबंधों में कहीं ना कहीं वहीं अनुशासन ही है ।

आपने देखा होगादु निया में जितने  भी लोग सफल हुए वो सभी ऐसे लोग थे जिन्होंने उन कामों को ज्यादा तवज्जो दिया जो ज्यादा जरूरी है या जिसे करने कि जरूरत है ,बजाय जो उसे ज्यादा पसंद है ।

मै शायद इसको बार बार कहता हूं पर सच में खुद पर नियंत्रण बहुत जरूरी है ।

क्यूंकि खुद पर नियंत्रण करके है कोई अपने लक्ष्य को पा सकता है,, चाहे उसका लक्ष्य सफलता, सेहत, प्यार या सम्पत्ति क्यों न हों ।

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