जब मैं
शायद 8वी क्लास में था तब गायत्री विद्यापीठ वाला एग्जाम दिलाता था, वहां कहीं पढ़ा था ज्ञान बांटने से बढ़ता है ।
हालाकि बाद में इसका विज्ञान पता चला
कि जब हम किसी को कुछ बार बार बताते है तो वो बात जो पहले कन्सियस माइंड (चेतन मन)में रहता है वह अनकंसियस माइंड (अचेतन मन) में चला जाता है । और ऐसी स्थिति में हमको चीजे अच्छे से याद रहती हैं ।उसी तरह जैसे हम बाइक चलाना शुरू करते हैं तों दिक्कत होता बाद में हम बिना देखे भी चला लेते हैं ।
खैर ये तो हुआ पहले की बात ,,,
लेकिन जैसे में कॉलेज में आया तो मुझे इस कथन में दो तरह के लोग मिले या कहूं जब आप किसी को कुछ बताते हैं तो आपको दो तरह के लोग मिलते है :-
१. जो पहले से उस बात को जानते हैं ।
२. जो पहले से उस बात को नहीं जानते हैं ।
1. वो *पहले से उस बात को जानते हैं*
ये लोग भी दो तरह से होते हैं
A. सकारात्मक सोच वाले - जो आपकी बातो को शांति से सुन लेंगे ये सोच के की चलो शायद कुछ नया नजरिया जानने को मिल जाए या इतने मन से बता रहा है रिवीजन हो जाएगा ।
B. नकारात्मक सोच - जो जानते है कहके बिल्कुल भी आपकी बातो पर ध्यान नहीं देंगे और मन में सोचेंगे की होशियारी मार रहा है ।
2. वो *जो पहले से नहीं जानते है*
ऐसे लोग भी दो तरह से दिखे मुझे
A.सकारात्मक सोच वाले - जो पूरे मन से की कुछ नया जानने को मिलेगा कहके सुनेंगे और कुछ प्रश्न भी पूछेंगे और हां आपके अहसानमंद रहेंगे की आपकी वजह से कुछ नया जानने को मिला ।
B. नकारात्मक सोच वाले - ये लोग सबसे पहले तो ये मानेंगे ही नहीं की कुछ अच्छा जानने को मिल सकता है , अपने को कुछ सर्वश्रेष्ठ की श्रेणी में रखेंगे और तुरंत बोलेंगे की तुम्हारी बातें यहां या वहां भी मिल जाएगा । ये कभी मानते ही नहीं की कुछ लोग कुछ बातो में उनसे बेहतर हो सकते हैं ।
अब इतना सारा classification कर दिया तो मन में चल रहा होगा की बताए की ना बताएं अच्छी बाते...
तो मेरा मानना है कि
🌱ज्ञान की बातें दिल खोल कर बताएं ।
🌱कोई बात बताते समय सामने वाले की आत्मसम्मान की रक्षा करे मतलब किसी को नीचा ना दिखाएं ।
🌱किसी एक को बुरा लग जाएगा तो आप बताना ना छोड़े क्यूंकि कई लोग आपके प्रयास से बेहतर हो सकते हैं । उनको फायदा हो सकता है ।
🌱 एक बात जरूर पूछ ले या जान लो कि क्या वो जानना चाहते हैं कि नहीं, इसलिए नहीं की आप कोई गुनाह कर रहे हैं बल्कि इसलिए कि आप सपना समय और नॉलेज किसी गैरजरूरी लोगो में व्यर्थ ना हो ।
🌱 और एक महत्वपूर्ण बात हमेशा रिजेक्शन के लिए तैयार रहे ,क्यूंकि ये जरूरी नहीं कि आप हमेशा सही हो या आपकी ली गई जानकारी सही हो आजकल फेक न्यूज भी रहते हैं ।
🌱 बोलने से ज्यादा सुनने में समय दे ।
🌱 जीवन यही कोई 50-60 बचा है तो अपनी आवाज को विचार को , अपने idea को अमर होने दे , कही छोड़ दे, कही बिखेर दे । ये मत सोचिए कि लोग क्या कहेंगे , अगर आपका उद्देश्य और कार्य सही है तो अपने विचार जरूर रखें ।
मै भी यही करता हूं अपने विचार व्यक्त करता हूं, ब्लॉग लिखता हूं, YouTube channel चलाता हूं,
और इन सबके अलावा
कुछ ना कुछ पढ़ता हूं ,
सीखने की कोशिश करता रहता हूं ,
आपसे ,
दूसरों से ,
खुद से ।
क्योंकि ये जरूरी तो नहीं की मेरे विचार हमेशा सही हो । यहां भी आप मुझे बता सकते हैं बेझिझक ।
Have a good day everyone...🐢
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