Skip to main content

I Don't care

I don't care
बहुत अच्छा वर्ड है आजकल जो लोग उपयोग करते हैं । अच्छा भी अहसास कराता है, आजादी  का अहसास । लगता है कि ये जरूरी भी है अपने दिल कि बात सुनना 👍🏻

पर यकीन मानिये आपका  I don't care वाली attitude  आपको अकेला कर सकती हैं ।

यहां एकांत की बात नहीं कर रहा हूं वो तो अच्छा है वो तो चयन है, जबकि अकेलापन एक अवस्था जो ना चाह कर भी मिल जाता है ।

ये अकेलेपन का एक किस्सा सुनाता हूं ......

         बात यूं है कि कुछ दोस्त तेलंगाना पढ़ने गए । कुछ 10 बच्चो की टोली थी । Young थे सभी 4 लड़के और बाकी लड़कियां । कुछेक साल का कोर्स था । उसमे से लड़का था  राजेश जिसकी बात मुझे पता चला और मै बता रहा हूं । 

देखो Boys कितना भी खींचाई करले सब साथ रहते थे , लड़कियां भी अच्छे से रह रहे थे सिवाय एक के  राशि नाम था उसका ।

राशि हमेशा i dont care attitude में जीती थी , उसके लिए अपना पढ़ाई और बाकी अपने मन का करती थी ।

यूं चर्चा हुई तो राजेश ने मुझे बताया कि राशि थी तो इंटेलिजेंट पर अपने हिसाब से जीती थी । बाकी क्लासमेट से थोड़ा अलग थी अपने हिसाब से सोना और अपने हिसाब से जगना , जबकि सब एक ही रूम में रहते थे ,,,,,,,

किसी की परवाह नहीं ।
बाकी सहेलियां भी राशि को आराम से उठकर आएंगी कहके इंस्टीट्यूट चले जाते थे । कुछ यूं ही कट रही थी जिंदगी राशि कि.....
          
        कोई सेमेस्टर एग्जाम का रिजल्ट बचा था शायद अचानक रात को अाया ,,,,!सब ने देखा , , राशि टॉप कि थी । राजेश और बाकी boys  तो अपने रिजल्ट से खुश ही रहते थे पर राशि का रिजल्ट देख अचंभित थे ।

       खैर सुबह हुई  सब इंटिट्यूट पहुंचे ,,, राशि थोड़ी लेट से पहुंची,
"बधाई हो राशि जी" राजेश ने कहा ।

राशि रोने लग गई ।
राजेश डरते हुए :अरे। मैंने कुछ गलत कहा क्या ???

राशि ने रूंधते हुए  कहा कि ; तुम पहले दोस्त हो जो बधाई दिए मुझे ।
मुझे अच्छा नहीं लगा कि किसी ने मुझे बधाई नहीं दिया  ।😥

उसकी बातो से मुझे और आपको भी लगा होगा कि राशि या हर कोई अपने आप को  महत्वपूर्ण अहसास कराना चाहती है , परन्तु  अपने से जुड़े लोगों की परवाह कर उसको महत्वपूर्ण अहसास वो भी नहीं करा रही थी इसलिए किसी को उसके खुशी से खुशी नहीं मिली।

यकीन मानिए आपको दुनिया की परवाह नहीं करना बल्कि  अपनो के लिए अपनो से जुड़े लोगों , परिवार , दोस्तों कि परवाह जरूर कीजिए ,
ज्यादा नहीं तो थोड़ा कीजिए ,
पूरा नहीं तो आधा ही कर लीजिए ।

अपने कई दोस्तों को ऐसे जिंदगी जीते देखता हूं कि अपने में ही खोए रहना, ना दोस्तो से मिलना कुछ हो जाए तो भी ना बताना ,

जीवन छोटी है अपने दोस्तो को समय निकाल के कुछ मिनट ही सही फोन लगाए । वो नहीं तो खुद ही बतिया लो । जैसे मुझे प्रेम का फोन आ जाता है मै प्रेम को लगा लेता हूं , लकी को , नीतीश, जय को लगा लेता हूं ,, ऐसे ही पुछ  लेता हूं कि का चलत हे ।

चलता तो कुछ खास है नहीं पर पुछ लो,,,,क्या पता कभी पता चले कि दोस्त सगाई कर लिया है ।😁

मुझे लगा कि ये बात बताना चाहिए , हो सकता किसी को राशि और राजेश में कोई अपना दोस्त दिख जाए , पात्र अलग हो सकते हैं पर घटनाएं तो हमारे बीच की हैं ।।।🙂

...🐢

Comments

Popular posts from this blog

शुतुरमुर्ग की खुशी जैसी तो नहीं है आपकी खुशी ??

कुछ दिन पहले मैंने एक आर्टिकल पढ़ा कि खुशी कि असली एहसास क्या है उस बारे में । उसके पढ़ते पढ़ते मुझे ये कहानी याद आई कि खुशियां असल में होती कहा है और हम ढूंढते कहा है । चलिए शुतुरमुर्ग के बारे में एक बात बताता हूं , असल में होता ऐसा है कि कहते है जब शुतुरमुर्ग के पीछे कोई शिकारी पड़ जाता है तो वो भागने के बजाय  अपना सिर रेत में घुसा देता है  और उसको लगता है कि सब तरफ अंधेरा छा गया अब वो सुरुक्षित है । *हैं ना ये बेवकूफी वाली बात*  पर पता है कहीं ना कहीं हम लोग भी ऐसे ही है । हम अपनी खुशियां उन चीज़ों में खोजते रहते है जो हमारे आसपास सब अच्छा दिखाता है जबकि असल में ऐसा नहीं होता  है । मैंने देखा कि एक लड़का आज पार्टी करता है जबकि पता है कि उसका कल पेपर है, पूछने पर भाई का जन्मदिन बार बार नहीं आता  ,यही है शुतुरमुर्ग वाली खुशी पेपर बिगड़ने के बाद एहसास होता है असली खुशी कहा है , क्यूंकि कई बार जिसका बर्थडे था वो पास हो जाए , यकीन मानिए बीएससी 2nd ईयर में ऐसा देखा है मैंने । किसी ने उस टाइम कहा मुझे अरे यार कस्ती को तूफानों में निकलने का अलग ही ...

Risk

Risk एक बार किसी ने एक किसान से पूछा - क्या तुमने इस मौसम में धान की फसल बोई है ?? किसान ने कहा - नहीं मुझे बारिश नहीं होने का अंदेशा था ! तो क्या मक्के बोए उस आदमी ने पूछा ? उसने कहा मुझे डर था कि कीड़े  मकोड़े खा लेंगे !! आदमी ने पूछा - आखिर तुमने बोया क्या है ?? किसान ने कहा : कुछ नहीं *मै खतरे नहीं उठाना चाहता था !!* 😢 कई लोगो में  फैसला ना लें पाने की आदत बन जाती हैं  और कई बार फैसला ना लेने के कारण कई अवसरों से हाथ धो बैठते हैं । *हमको ना...* 🌿हंसने में बेवकूफ समझे जाने  डर है, 🌿रोने में जज्बाती समझे जाने का डर है, 🌿सीखने में सफल ना होने का डर, 🌿प्रेम करने में बदले में प्रेम  मिलने का डर, डर तो बहुत सारे है पर आपको तो रिस्क उठाने ही पड़ेंगे, *रिस्क लेने और बेवकूफी में फर्क है*😁 खतरे उठाने का मतलब बेवकूफी और गैरजिम्मेदारी बरतना नहीं होता है। एक उदाहरण देता हूं मेरी एक दोस्त की शादी थी रात को पार्टी वगैरह  होते 11:45 के आसपास हो गया था । जब घर जाने के लिए हुए तो बाकी सब तो दुर्ग वाले थे लेकिन एक दोस्त जो भिलाई की थी वो ज़िद करने ल...

करना है तो करना है

मै हमेशा  कहता रहता हूं कि किन आदतों को अपनाकर सफल हो सकते है , किस आदत को छोड़कर हम बेहतर हो सकते है, ये  सफल होने वाला व्यक्ति अच्छे से जानता है । परन्तु सच्चाई ये है कि 100 में से 90 ऐसे लोग जो जानते है कैसे सफल हो सकते है अपने किसी कार्य में सफल नहीं होते है । तो असल बात ये है कि जानने से कुछ नहीं होता कि सफलता कैसे मिलती है, क्यूं मिलती है । जो लोग काम करते है रिजल्ट देते है वो ही सफल माना जाता है,,  तो मुद्दा अब ये आता है सबके साथ  कि मै सोचता तो  हूं कि ये करूं पर शुरू नहीं हो पाता है , यह एक सामान्य सी बात है जो हम सबके साथ होता है कि हम करना तो बहुत कुछ चाहते है पर असल में कर नहीं पाते हैं और कुछ लोग चाहते है वो आपके देखते ही देखते पा लेते है । जैसे मुझे एक किताब पढ़ना है डिसाइड करते है, कि इसे इतने दिनों में पूरा कर लूंगा पर कुछ काम आ जाता या थोड़ा आराम करलू, या थोड़ा टीवी देख लूं या उस किताब को छोड़ के कोई और किताब पढ़ने  लग जाते है  ।  ज़िन्दगी में सफलता ऐसे हासिल नहीं कि जाती है , तो आखिर क्या बात है जो हर सफल व्यक्ति में होता है जो उ...