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दोस्ती की परिभाषा

एक कहानी से शुरू करते है..
बचपन के दो दोस्त थे जो स्कूल ,कॉलेज और अंत में फौज में साथ  में ही भर्ती हुए । युद्ध छिड़ गया और दोनों एक ही  यूनिट में थे ,, एक रात उन पर हमला हुआ, चारो तरफ गोलियां बरस रहीं थी । ऐसे में अंधेरे से एक आवाज आई  "अबे अरुण इधर  आ ना , मेरा मदद कर"  सुनील  ने अपने दोस्त अरुण कि आवाज फौरन पहचान ली। उसने अपने कैप्टन से पूछा : क्या मै जा सकता हूं ? कैप्टन ने जवाब दिया .." नहीं मै तुमको जाने की इजाजत नहीं दे सकता मेरे पास पहले से आदमी कम है ,मै अपने एक और आदमी को खोना नहीं चाहता । साथ ही अरुण कि आवाज से ऐसा लगता है कि वह बचेगा नहीं ।
 
*सुनील चुप रहा ,, फिर अरुण कि आवाज आयी,,सुनील आओ मेरी मदद करो ।

*सुनील चुप रहा क्योंकि कैप्टन ने उसे जाने कि इजाजत नहीं दी थी । वहीं आवाज बार बार आई ।सुनील अपने आप को और ज्यादा रोक नहीं सका और कैप्टन से कहा " कैप्टन वो मेरा बचपन का दोस्त है, मुझे उसकी मदद के लिए जाना ही होगा ।

कैप्टन ने बेमन से इजाजत दे दी ।

*सुनील अंधेरे में रेंगता गया और अरुण को अपने खड्डे में ले आया । सबने देखा कि अरुण तो मर चुका था ।*

*अब कैप्टन नाराज हो गया और सुनील पर चिल्लाया "मैंने कहा था ना कि वह नहीं बचेगा , वह मर गया और तुम भी मारे जाते ,, तुमने वहां जाकर बड़ी गलती की थी ।

*सुनील ने जवाब दिया : कैप्टन मैंने जो किया सही किया । जब मै अरुण के पास गया तो वो जिंदा था, उसके आंखो में मरते समय चमक थी एक संतोषजनक अहसास था*
 और
*उसके आखिरी शब्द थे: सुनील मुझे यकीन था कि तुम जरूर आओगे ।* * ।

एक पुरानी कहावत है :
*"एक छटाक वफादारी एक सेर चालाकी से ज्यादा अच्छी है ।"*


*भरोसेमंद और वफादार होना एक सच्चे दोस्त की निशानी है । काबिलियत बहुत जरूरी है लेकिन भरोसेमंद होना अनिवार्य है ।*

आजकल की फिल्मी दोस्ती मुझे कभी समझ नहीं आता , जिसमें वफादारी और भरोसा ही नहीं है । कुछ लोगो को कहते सुना कि वो मेरा दोस्त है पर मुझे उस पर भरोसा नहीं है, पैसा या किताब नहीं दे सकता  या घर नहीं ले जा सकता उसे । ये कैसा दोस्ती है यार..,

ये क्या है कि दोस्त को खूब मार रहे हैं क्यूंकि उसका बर्थडे है , प्रताड़ना को दोस्ती के मज़े मनाना कहा तक सही है और ऐसी दोस्ती कहा तक टिकती है ...🤔

मैंने ऐसे इंजिनियरिंग के दोस्तो को देखा हैं जो सिर्फ पीने के लिए साथ बैठते थे, और जब बहुत जरूरी काम होता था तो व्यस्त हो जाते थे । 

असल में दोस्ती को कोई समझ ही नहीं सका कभी सब अपने हिसाब से परिभाषित करने लगते है। 

*दोस्ती तो त्याग मांगती है और इम्तिहान लेती है ।स्वार्थ की भावना दोस्ती को तोड़ देती है । हल्के फुल्के रिश्ते तो आसानी से बना जाते है, लेकिन सच्ची दोस्ती बनाने और कायम रखने के लिए समय और प्रयास कि जरूरत होती है ।* 

मेरा एक दोस्त k  है उसने अपने एक दोस्त को कुछ पैसे उधार दिया , उसके दोस्त ने कुछ पैसे लौटाया और जॉब लगेगा तो दूंगा कहके नहीं दिया।  टीचर था प्राइवेट स्कूल में तो लाकडाउन में बंद हो गया ,,उसने उससे पैसा मांगा तो फिर कुछ दे दिया।  आप उसे बेवकूफ कह सकते है पर उसने मुझे कहा कि देख यार अभी उसे जरूरत है इस समय नहीं दिया तो मै दोस्त के रूप में खुद को माफ़ नहीं कर पाऊंगा ।
यकीन मानिए ऐसे K जैसे दोस्त बहुत मुश्किल से मिलते है ।।

*सच्ची दोस्ती में मदद करना एक दूसरे पर एक अहसान नहीं होता । यह दोस्ती कि सहज अभिव्यक्ति है , उसका मकसद नहीं । एक दूसरे से मदद हासिल करना मकसद  बन जाए तो मकसद खत्म होने पर दोस्ती भी खत्म हो जाती है ।*

*सच्ची दोस्ती एक दूसरे की इज्जत पर आधारित रहता है । दो दोस्तो के मन में एक दूसरे के लिए भलाई होती है  इसका आधार चरित्र और वचनबद्धता होते है ।*

एक घटना बताता हूं आपको समझ आ जाएगा कैसे: 
एक दोस्त कि नई नई शादी हुई थी ,, उसकी बीवी मायके गई थी तो सारे दोस्त उसके यहां पार्टी करने गए । रात तक पार्टी चली सुबह सोए थे तो उसकी वाइफ का  फोन आया कि मै बस स्टैंड में हूं लेने आ जाओ,, वो हड़बड़ा गया उसने अपने दोस्तो को कहा तो बोले यार भाभी को मना लेंगे तू  जा। उसकी वाइफ आई तो घर का हालत देख कर बहुत गुस्सा हुई ,, सबने सॉरी कहा तो वो कुछ नहीं बोली पर आप समझ सकते हो दिन भर पति पत्नी के बीच बात तो हुई होगी।

ऐसी ही घटना उसी दोस्त से साथ फिर हुआ दोस्त अलग थे ,फिर वही सुबह फोन आया वो हड़बड़ा गया, अपने दोस्तो को बताया वो भी हड़बड़ा गए ,, दोस्तो ने उसे बस स्टैंड भेज दिया उसके आते तक जितना बन सके सब बर्तन ,बिस्तर आदि साफ सफाई कर के बाहर वहीं बरामदे में अधभरे नींद से बैठ गए ।
भाभी आई इनको देख कर पूछी इन्होंने सब सच बता दिया। वो गुस्से से घर में अंदर गई पर घर के हालात देख कर खुश हो गई और बोली भैया मै आप सबके लिए चाय बना देती हूं ।

*सच्ची  दोस्ती की परख आप स्पष्ट लगा सकते है ।आपसी विश्वास और भरोसा हर दोस्ती की बुनियाद है । कोई भी पूर्ण नहीं होता पर , सबमें कुछ कमी या बुराइयां होती है ,पर रिश्तों को महत्व देकर उन्हें गंभीरता से लेना चाहिए,,चाहे वो आपके पत्नी, पति या मित्र क्यों ना हो ।*

है ना...
सो आप सभी को..

*Happy friendship day*..🍫।


🐢


Source:
#you can win by shiv khera
#my thoughts..

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