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हम खुद का आकलन कम तो नहीं कर रहे !!

हम कौन है ?, हमारी अहमियत क्या है,? हमारी पहचान क्या है ,, कई बार हम अपने आपको गलत आकने लग जाते है ।इसमें हमारी गलती नहीं होती । कई बार आसपास के लोग , घर परिवार के लोग, फोकेटिया सलाहकार के कहे शब्द हमारे विचार को बहुत प्रभावित करते है । कैसे देखिए.... एक  बच्चा था 12 वी क्लास का होगा , थोड़ा कमजोर था, कई सवाल बनते नहीं था । एक दिन उसके टीचर ने उससे कहा कि तुम कुछ काम धाम करना शुरू कर लो,  क्यों टाइमपास कर रहे हो यहां । वो फिर भी पढ़ता  रहा पर अधूरे मन से और थर्ड डिवीजन से पास हुआ, फिर कई सालो तक   इधर उधर भटक कर छोटे मोटे  काम करता रहा । लगभग सात साल बाद एक ऐसे ही एक  रिसर्च स्कॉलर के द्वारा आम लोगो के आई क्यू के आकलन के दौरान उसे पता चला कि उसका आई क्यू 170 था ।  सोचो उसे क्या हुआ होगा ,, वो खुद को ज्यादा महत्वपूर्ण महसूस करने लगा , उसने किताबे लिखीं, एक सफल व्यापारी हुआ और तो और वो अंतरराष्ट्रीय मैंशा सोसायटी का चेयरमैन भी बना ।  ये घटना है विक्टर सेरिब्रायकोफ कि,, सोचिए कितने लोग हैं आपके आसपास जो ऐसे की घूम रहे है कि किसी ने क...

क्या बुरे चीजों से सीखना समय का सदुपयोग है ??

"बुरी खबर ये है कि समय उड़ता है ।  अच्छी खबर यह है कि आप ही इसके पायलट है ।  - माईकल आल्थसुलर मै बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं ,जबकि लॉक डाउन में  मेरे पास काफी समय था । हुआ यूं कि किसी दिन किसी ने मुझसे कहा कि  ये मोटिवेशनल वैगरह से कुछ नहीं होता , जिसको जो करना रहता है वहीं करता है । मै सोच में पड़ गया कि क्या सच में ऐसा होता है, मै इसी का उत्तर ढूंढने लगा  !! खैर मैंने थोड़ा विराम लेकर कुछ नया अपनी कहानी लिखने लगा । अचानक एक दिन उससे फोन में बात हुई बातें करते हुए उसने अचानक एक जगह कहा की यार तेरा एक आर्टिकल पढ़ा था बहुत पहले वो मुझे इस समय काम आया । तभी ख्याल आया कि ऐसा ही होता है ,, अच्छी चीजें कहीं ना कहीं प्रभावित करती हैं,, नहीं तो बुरी चीजें प्रभावित करने लग जाते है । क्योंकि दिमाग एक खाली उर्वर भूमि की तरह ही  है जिसमें अगर उसमे पुष्प, औषधि, फलदार, सुंदर पौधे ना लगाएं तो खरपतवार पैदा हो ही जाती हैं । कहते भी हैं खाली दिमाग शैतान का घर अगर कुछ अच्छा या रचनात्मक नहीं कर रहे हो तो कुछ शरारत  करने लग जाता है ।       ...

एक सही मदर्स डे असल में क्या होता है ??

एक घटना बताता हूं,, एक समय एक मां के तीन बच्चे थे ,तीनों  काफी होशियार और पढ़ाई में भी अच्छे थे । तीनों बहुत मेहनती थे । तीनों अपने मां से प्रेम भी बहुत करते थे।   एक समय गर्मी के दिन थे,,  कॉलेज जाते समय तीनों नई बाइक के लिए लड़ने लगे । मां ने तीनों की कुटाई कर दी । फिर आगे रोते गाते गुस्से से तीनों कॉलेज गए ।   शाम को तीनों अलग अलग आ रहे थे, क्यूंकि सुबह की पिटाई का दोष सब एक दूसरे को दे रहे थे । मां पास के नल में पानी भर रही थी ,, दो चार बाल्टियां थी ,,  बच्चों की अच्छी बात ये रहती है , खासकर जब वो अभी अभी जवान हुआ हो ,, वो बचपना गया नहीं रहता । अब जैसे ही पहला बच्चा मां के पास पहुंचा   , मां ने पूछा कैसा रहा दिन ? उस बच्चे ने कहा बेकार सुबह पिटाई तो कि थी, ऐसा बोल कर चला गया । दूसरे बच्चे से भी मां ने यही पूछा , उसने भी यही कहा कि सुबह मार पीट के भेजते हो तो दिन कैसा जाएगा और चला गया । अब आई तीसरे बच्चे की बारी वो बड़ा था , मंझला था या छोटा था मुझे नहीं पता ,, उससे भी मां ने वहीं पूछा.. वो झुंझला कर बोला , सुबह कित्ता पिटे थे,...

वो आखिरी मंजिल का कमरा.....

👘🧟‍♀ *वो आखिरी मंजिल  का कमरा*  ☠ दिनांक 11 मार्च ... मैं होली मना के घर से आया था , सोच रहा था अपना रूम बदल लूं,, बहुत दिनों से मै घर ढूंढ़ रहा था , चाह रहा था,, कि कोई अच्छा सा कमरा मिल जाए इस तरह का की बैचलर वाली लाइफ हो बस एक दो कमरा और किचन - बॉथरूम ,, एक सिंगल लड़के को और क्या चाहिए । इधर समाचार मै देख रहा था कि  देश का मौहाल भी बदल रहा  है ,, कॉरोना वायरस से संक्रमित लोग बढ़ रहे है,, लग रहा है कि कुछ दिनों में यहां भी लॉक डाउन कर देंगे । 12मार्च से लेकर 13मार्च तक ऑफिस में इतना काम आ गया कि फुरसत का टाइम हो नहीं मिला ,,  14 मार्च को छुट्टी मिला  तो मै घर ढूंढने निकल गया ,,  पूरा दिन ढूंढ़ लिया तो कोई बैचलर के नाम से नहीं दिया तो कोई शादी करके आओ बोलकर  नहीं दिया । 15 मार्च को मै फिर निकला शहर  में खूब ढूंढा पर फिर वही निराशा ,,  अब मै शहर के  कुछ बाहर कुछ पहाड़ी इलाका है हरा भरा उधर मेडिकल कॉलेज भी है उसी रोड में ऐसे ही टहलने निकल गया ,, शाम का वक्त था सूरज पहाड़ के पीछे छुप रहा था ।          क...

प्रकृति के साथ

*प्रकृति के साथ*..👣🐾 चलो एक बात पूछता हूं आज सबसे कि प्रकृति के साथ कौन चलता है  या चलने की कोशिश करते हैं? 🌿🌱🌳🎋🍃🌾🐚🐜🐛 ज्यादातर मान लेंगे कि कोशिश तो करते है पर हो नहीं पाता या हम करते है ।  मेरे कई दोस्त ऐसे भी है जो साल भर में मुश्किल से 30 दिन सुबह सूरज को उगते देखे होंगे ।सुबह के किरण को महसूस किए हो या सुबह के ओस को बिछे देखे हो ।  यकीन मानिए आप चाहे माने या नहीं हम  सबके लिए *आज के समय में ये सबसे जरूरी है ।*             यकीनन मै भी इस  जॉब में आने के बाद थोड़ी आलस से जिंदगी बिता रहा था, आराम से सोना आराम से 9 बजे तक उठना पर *जीवन में  कभी ना कभी आपको आइना दिख ही जाता है ।* मेरे साथ भी यही हुआ और जल्दी हो गया ।         कुछ दिन पहले की बात है मै जशपुर तरफ गया था एक आदमी का डोलामाइट खदान के पर्यावरण सम्मति के संबंध में जांच करने  , मै देख ही रहा था पर वो बहुत जल्द बाज़ी में था मै गुस्सा गया कि अरे यार  मै संतुष्ट होकर  ही आगे सोचूंगा तुम जल्दी जल्दी क्यों कर रहे हो !! वो तो कुछ न...

कुछ पंक्तियां..

कुुछ बातेे हमेशा कहना चाहता है हर कोई की कोई ना कोई रहता ही है कुछ उम्मीद में हमारे लिए हम ही समझ नहीं पाते । ये पंक्तियां मेरे उन्हीं लम्हों में लिखते लिखते यूं ही लिखा गए थे । वो सारे सपने देखने वाली , जिसकी मुझे तलाश है, हां वो तुम थी ।

कीमत चुकानी ही हैं ..कुछ भी मुफ्त नहीं इस जीवन में !!

कभी - कभी किसी - किसी का निर्णय बहुत कुछ सीखा जाता है ,, ऐसा ही हुआ कि कुछ दिन पहले मेरे एक दोस्त जो कि 7 वर्ष से पीएससी की तैयारी कर रहा है उसका  कॉल आया मेरे पास कि वो इस बार पीएससी का मैंस नहीं दिलाएगा !! मै  उस समय बहुत अचंभित हुआ क्योंकि वह इतने सालो से तैयारी कर रहा था ये उसका तीसरा प्रयास था , कुछ रैंक से बच रहा था 🤔। उसका कहना था कि मै अब  व्याख्याता की तैयारी करूंगा , दोनों तरफ नहीं जा सकता मुझे फिलहाल जॉब चाहिए और ये सीधी भर्ती है , गजेटेड पोस्ट है, इसमें पोस्ट भी ज्यादा है इसे मै छोड़ नहीं सकता बाकी पीएससी तो निकाल ही लूंगा । मुझे भी उसका डिसिजन सही लगा क्योंकि बहुत कॉन्फिडेंट लग रहा था , उसका जुनून देखने ही लायक था । कुछ दिन पहले रिजल्ट आया व्याख्याता का और उसका रैंक अच्छा आया हमारे किसी और दोस्त का नहीं हुआ उसमें । वो 2013 से 2019 तक मेहनत तो कर रहा था  पर चूक सा था कुछ ..हो सकता है किस्मत का हाथ हो पर ....पर उसका जुनून बढ़ गया था यकीनन कीमत बहुत बड़ी चुकाई थी । 🌵 * याद रखिए आपको कुछ पाने के लिए उसकी कीमत चुकानी ही होगी**कु...